दुराचारियों को फांसी देने का केन्द्र का अध्यादेश ऐतिहासिक: सीएम शिवराज

भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा 12 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के साथ दुराचार होने पर फांसी की सजा देने के लिए लाए गए अध्यादेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने इस कड़े फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय मंत्री मंडल को धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर मध्यप्रदेश ने भी पहल की थी। पिछले विधानसभा सत्र में एक विधेयक पारित किया गया था, जिसमें 12 साल से कम उम्र की बेटी के साथ दुराचार के प्रकरण में फांसी की सजा का प्रावधान किया था। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार केवल मानव के लिए होते हैं। राक्षसों के मानव अधिकार नहीं होते। ऐसे राक्षस जो दूसरे की जिंदगी से खेलते हैं, गरिमा को तार-तार करते हैं और जीवन को नरक बना देते हैं, उनको जीने का कोई हक नहीं है। दुराचारियों को मृत्युदण्ड देने का जो फैसला केन्द्र ने लिया है, उससे अपराधियों में खौफ पैदा होगा। बेटियों के साथ दुराचार करने का विचार आने से पहले वे सौ बार सोचेंगे। बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसे ही कड़े कदमों की जरूरत थी, इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

इंदौर की त्रासदपूर्ण घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र द्वारा लाए गए अध्यादेश के परिप्रेक्ष्य में अब अपराधी को फांसी देने का फैसला लेना आसान हो जाएगा। इस प्रकरण को संवेदनशील मानते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई होगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि अपराधी को जल्द से जल्द फांसी की सजा मिले।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर मध्यप्रदेश ने दण्ड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक -2017 पारित कर राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा गया है। इस विधेयक में भी कड़े दण्डात्मक प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों के अनुसार जो कोई 12 वर्ष तक की आयु की बेटी के साथ ज्यादती करेगा, उसे मृत्युदंड मिलेगा या कम से कम 14 साल तक की कठोर सजा होगी। एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा ज्यादती करने पर मृत्युदंड या 20 वर्ष का कठोर कारावास मिलेगा।

शादी का झांसा देकर ज्यादती करने वाले को तीन साल की सजा मिलेगी और जुर्माना होगा। पीछा करने पर पहली बार में तीन वर्ष की सजा और जुर्माना होगा। दूसरी बार में सात साल तक की सजा हो सकती है। एक लाख रुपये का जुर्माना होगा। निर्वस्त्र करने पर पहली बार तीन साल से सात साल तक का कारावास। गैर-जमानती अपराध होगा। दूसरी बार में ये सजा 10 साल की कैद और एक लाख जुर्माना का प्रावधान म.प्र. के विधेयक में किया गया है।

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