देवघर या देवताओं का घर, जहां साल भर आते हैं पर्यटक

बैद्यनाथ धाम, बाबा धाम और कई अन्य नामों से जाना जाने वाला झारखंड जिला का शहर देवघर पवित्र हिंदू तीर्थो में से एक है। इसे देवगढ़ भी कहा जाता है। आप देवघर आएंगे तो बैद्यनाथ यात्रा से ही जान जाएंगे कि भारतीय हिंदू के लिए आध्यात्मिकता क्या अर्थ रखती है। यहां तीर्थयात्रियों का तांता लगा रहता है। यह शहर हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल है। यहां भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है। हर सावन में यहां लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है जो देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों से भी यहां आते हैं। इन भक्तों को कावरियां कहा जाता है। ये शिव भक्त बिहार में सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। देवघर शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह एक प्रसिद्ध हेल्थ रिजॉर्ट है, लेकिन इसकी पहचान हिंदु तीर्थस्थान के रूप में की जाती है। यहां बाबा बैद्यनाथ का ऐतिहासिक मंदिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। देवघर सती के 52 शक्तिपीठों में से भी एक है। पुराणों में देवघर को हृदय पीठ और चिता भूमि भी कहा गया है क्योंकि इसी स्थान पर माता पार्वती का हृदय गिरा था और और यहीं भगवन शिव ने उनका अंतिमसंस्कार किया था।

पर्यटन स्थल:-

बैद्यनाथ मंदिर

बैद्यनाथ मंदिर में स्थापित लिंग भगवान शिव के बारह च्योतिर्लिगों में से एक है। भगवान श्री बैद्यनाथ च्योतिर्लिग का मंदिर जिस स्थान पर अवस्थित है उसे बैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह च्योर्तिलिंग लंकापति रावण द्वारा लाया गया था। बैधनाथ को आत्मलिंग, महेश्वर्लिंग, कमानालिंग, रावणेश्वर महादेव, श्री वैधनाथलिंग, नर्ग तत्पुरुष और बेंगुनाथ के आठ नामों से जाना जाता है। बैद्यनाथ धाम में यूं तो सालों भर लोग च्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन सावन व अश्रि्वन मास में यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पहुंचती है। बैद्यनाथ का मुख्य मंदिर सबसे पुराना है जिसके आसपास अनेक अन्य मंदिर भी हैं

बासुकीनाथ मंदिर

बासुकीनाथ अपने शिव मंदिर के लिए जाना जाता है। बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकीनाथ में दर्शन नहीं किए जाते हैं। यह मंदिर देवघर से 45.20 किलोमीटर दूर स्थित हिन्दुओं का यह तीर्थ स्थल दुमका जिले में स्थित है।

बैजू मंदिर

बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मंदिर भी हैं। इन्हें बैजू मंदिर के नाम से जाना जाता है।

त्रिकुट पहाड़ियां

देवघर से 16 किलोमीटर दूर दुमका रोड पर एक ख़ूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है। इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं। यह स्थल मयूराक्षी नदी के स्रोत के लिए प्रसिद्ध है।

नौलखा मंदिर

देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की ख़ूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था।

नंदन पहाड़

शांत और प्राकृतिक वातावरण एक खूबसूरत मंदिर की उपस्थिति के कारण और भी जीवंत हो उठता है। नंदन पहाड़ देवघर के छोर पर स्थित है। इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है। जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं। यहां बच्चों के बड़ा पार्क भी है।

सत्संग आश्रम

देवघर के दक्षिण पश्चिम में स्थित सत्संग आश्रम झारखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। इसकी स्थापना ठाकुर अनुकूलचंद्र द्वारा की गई थी। यह बहुत ही सौम्य और शांत वातावरण में स्थित है। सर्व धर्म मंदिर के अलावा यहां पर एक संग्रहालय और चिड़ियाघर भी है।

तपोवन

देवघर से 10 किमी दूरी पर स्थित तपोवन अपने प्रसिद्ध शिवमंदिर के लिए जाना जाता है। गुफाओं और पहाड़ी पर बने मंदिरों के लिए जाना जाने वाला तपोवन एक रमणीय स्थान है। मान्यता है कि यह ऋषि बाल्मीकी तपस्या करने आए थे। कहते हैं कि श्री बालानंद बह्माचारी ने यहां पर तप करके दिव्यता प्राप्त की।

पहुंचने का माध्यम

वायुमार्ग-पटना निकटतम हवाईअड्डा है और भारत के सभी प्रमुख स्थानों से उड़ानों द्वारा जुड़ा है।

रेलमार्ग-निकटतम रेलवे स्टेशन बैद्यनाथ धाम है। जसीडीह जंक्शन भारत के सभी प्रमुख भागों से जुड़ा है।

सड़कमार्ग-देवघर भारत के प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा है।

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