नड्डा की चुनौती

एक मध्यवर्गीय गैर-राजनीतिक परिवार से संबंध रखने वाले 59 वर्षीय जगत प्रकाश नड्डा का विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे बड़े दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना जहां उनके लिए गर्व का विषय है, तो चुनौतियां भी अपार हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत तमाम वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने नड्डा को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में पार्टी और भी बुलंदियों को छुएगी। ऐसे अवसर पर ऐसी शुभकामनाएं स्वाभाविक हैं। साथ ही नेतृत्व संभालने वाला व्यक्ति भी ऐसा विश्वास दिलाता है और सपना भी ऐसा ही करने का पालता है। इसीलिए हर नए नेतृत्व को राजनीतिक परीक्षाओं की कसौटियों पर कसा जाता है। इसी क्रम में नड्डा के नेतृत्व की असली परीक्षा राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी चुनौतियों के रूप में होगी।

बेशक भाजपा के राजनीतिक सफर में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन नरेंद्र मोदी-अमित शाह के दौर में भाजपा ने जो मुकाम हासिल किया है, वह किसी भी राजनीतिक दल का सपना हो सकता है। अगर भाजपा और उसके मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे के नजरिए से देखें, तो मोदी-शाह की जोड़ी के नेतृत्व काल में उस दिशा में पार्टी और सरकार की रफ्तार बेहद तेज रही है। फिर भी अगर बतौर अध्यक्ष नड्डा का सफर चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, तो इसलिए कि अभी तक अजेय नजर आ रही भाजपा की कमजोरियां राज्य स्तर पर उजागर होने लगी हैं। सहयोगी दल साथ छोड़ रहे हैं। कई राज्यों में उसे सत्ता गंवानी पड़ी है।

अगर आने वाली चुनौतियों की बात करें, तो नड्डा की पहली परीक्षा दिल्ली विधानसभा चुनाव होंगे, जहां 8 फरवरी को मतदान होना है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को हराना भाजपा के लिए फिलहाल तो सपना ही है। हालांकि दिल्ली की नाकामी को नड्डा से जोडऩा उनके साथ अन्याय होगा, लेकिन 2020 में ही होने वाले बिहार और 2021 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के परिणामों की जवाबदेही से वह नहीं बच पाएंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड और उत्तर प्रदेश में पार्टी में बढ़ते असंतोष और अंतर्कलह से भी उन्हें निपटना होगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति में आए और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के बाद भाजपा में भी राष्ट्रीय महासचिव एवं कुछ माह कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे नड्डा के पास लंबा संगठनात्मक अनुभव है। अब जबकि नड्डा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भूमिका मिल गई है, तो उनकी चुनौतियां ज्यादा जटिल हो जाती हैं। क्योंकि उन्होंने पार्टी की कमान उन अमित शाह से संभाली है, जिन्होंने अप्रत्याशित चुनावी सफलताओं के जरिए अध्यक्ष के रूप में अपनी छवि इतनी विराट बना ली कि हर आने वाले अध्यक्ष का आकलन उसी आलोक में किया जाएगा। ठ्ठन्यूज डेस्क

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