नारी शक्ति की धमक

2019 का यह साल महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के साथ गणतंत्र दिवस के 70 बरस पूरे कर चुका है। ऐसे में गांधीजी के कहे कुछ अल्फाज याद करते हैं, ‘एक औरत पुरुष की साथी है, बराबर दिमागी क्षमता के साथ’। इसके अलावा ग्रंथों में भी लिखा है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। इसका अर्थ है- जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता भी निवास करते हैं। साथ ही ‘नारी शक्ति’ शब्द 2018 का वर्ड ऑफ ईयर चुना गया है। इसे ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी शामिल किया गया है। कहने का मतलब यह है कि आज की नारी पुरुषों के साथ न सिर्फ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है, बल्कि कई बार आगे भी निकल जाती है। अब इस बार के गणतंत्र दिवस को ही ले लीजिए। राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में इस बार ‘नारी शक्ति’ का पराक्रम देखते ही बन रहा था। साथ ही साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए और यूपी की राजधानी लखनऊ में भी नारी शक्ति ने खेलों में अपनी धमक दिखाई। आइए आपको भी सुनाते हैं नारी शक्ति के बढ़ते कदमों की गाथा।

भावना की ‘कस्तूरी’

लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी भारतीय सेना की पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्होंने आजादी के बाद पहली बार 144 पुरुष सैन्यदल की परेड को लीड किया। 26 साल की भावना हैदराबाद की हैं, उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से मास्टर की डिग्री हासिल की है। भावना पढ़ाई में तो अच्छी थीं ही, डांस और गाना गाने में भी अच्छी थीं। उन्होंने क्लासिकल डांस में भी डिप्लोमा किया है। 23 साल तक आम सी जिंदगी जीने वाली लड़की को नहीं पता था कि वह कभी इतिहास भी रच सकती हैं। आजादी के 71 साल बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में भावना पहली वह महिला बनीं, जिन्होंने 144 पुरुष सैन्यदल की टुकड़ी का नेतृत्व किया। भारतीय आर्मी सॢवस कॉप्र्स की लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी को घर वालों और पति के सहयोग के चलते इस मुकाम तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल नहीं लगा। हालांकि उन्हें एक लड़की होना कुछ लोगों ने समय-समय पर जरूर याद दिलाया।

हरियाणा की ‘खुशबू’

राजपथ पर पहली बार नजर आए असम राइफल्स के महिला सैनिकों के दस्ते का नेतृत्व मेजर खुशबू कंवर ने किया। खुशबू हरियाणा के भिवानी जिले की रहने वाली हैं। पहली बार महिला जवानों का 148 सदस्यीय दल गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुआ। मेजर खुशबू कंवर कहती हैं कि राजपथ पर राष्ट्रपति को सलामी देना गर्व की बात थी। असम राइफल्स के महिला दस्ते का नेतृत्व करना भी गौरवान्वित करने वाला रहा। मणिपुर के उखरुल में मेजर के पद पर तैनात खुशबू कंवर का जन्म जयपुर में हुआ था। अप्रैल 2012 में उन्हें सेना में कमीशन हासिल हुआ। अप्रैल 2013 में उनकी शादी भिवानी के गांव इंदीवाली वासी मेजर राहुल तंवर से हुई। मेजर राहुल तंवर को 2010 में सेना में कमीशन मिला। 2018 में खुशबू कंवर मेजर बनीं। उनके ससुर कैप्टन महेंद्र सिंह तंवर भी सेना से रिटायर्ड हैं। उनकी सास सुषमा तंवर समाजसेविका हैं। उनकी ढाई साल की एक बेटी भी है।

करतब बाजी की ‘सुरभि’

गणतंत्र दिवस पर पहली बार आर्मी सर्विस कॉप्र्स की वह टुकड़ी, जिसमें पुरुष बाइक पर कमाल की करतब बाजी कर सबको चौंका देते हैं, एक महिला ने इनका साथ दिया। कैप्टन शिखा सुरभि डेयरडेविल्स की पहली महिला बनीं, जिन्होंने परेड में हिस्सा लिया। शिखा 15 साल की उम्र से ही इस तरह के करतब करती आ रही हैं। आर्मी में आने के बाद शिखा को बुलेट पर करतब दिखाने का मौका मिला। शिखा को बॉक्सिंग और बास्केटबॉल का बहुत शौक है, जिसके चलते उन्होंने आर्मी ज्वॉइन की। फिलहाल शिखा भारतीय सेना सिग्नल कोर डिवीजन में कार्यरत हैं और पंजाब के भटिंडा में पोस्टेड हैं। झारखंड के हजारीबाग जिले में जन्मीं कैप्टन शिखा सुरभि की मां किरण सिंह ने उन्हें हमेशा सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। शिखा के पिता शैलेंद्र सिंह एलआईसी के अभिकर्ता हैं। सेना में काम करते हुए शिखा ने पर्वतारोहण सीखा। बॉक्सिंग भी सीखी और इसमें गोल्ड मेडल भी जीता।

नेवी की अंबिका

लेफ्टिनेंट अंबिका सुधाकरन ने भारतीय नौसेना के कंटिनजेंट का नेतृत्व किया। इस दस्ते में 144 युवा नाविक थे। अंबिका कहती हैं, ‘राष्ट्र की सेवा के लिए पुरुष और महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे।’

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