नोएडा में अटके पड़े 3 लाख फ्लैट्स को पूरा करेगी केंद्र और यूपी सरकार

नई दिल्ली: केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अटके हुए करीब 3 लाख फ्लैट्स का काम पूरा कर उनकी डिलीवरी तेज करने के लिए फंड बनाने पर भी विचार कर रही हैं। यही नहीं सरकार इन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के बिल्डरों के पास खाली पड़ी जमीन को इस्तेमाल करनी की योजना भी बना रही है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सरकारी बैंकों के बीच इस सैक्टर के लिए स्ट्रेस फंड को लेकर बातचीत हुई है। गोयल इस वक्त वित्त मंत्रालय का कामकाज देख रहे हैं, हालांकि इस स्ट्रेस फंड की राशि कितनी होगी इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। संभावना जताई जा रही है कि शुरुआत में इसके 1 से 2 हजार करोड़ रुपये होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में हाउसिंग सेक्रेटरी डीएस मिश्रा भी शामिल थे।

बैठक में हाउसिंग मिनिस्ट्री, एनबीसीसी और बैंकों से एक ऐसी योजना बनाने के लिए कहा गया है जिस पर तुरंत कदम बढ़ाया जा सके। खाली पड़ी जमीनों के इस्तेमाल के लिए बैठक में चर्चा हुई है कि इन्हें एनबीसीसी जैसी एजेंसियों को सौंपा जाएगा, ताकि एनबीसीसी इन जमीनों में संसाधन पैदा करे या फिर इन्हें विकसित कर 10-10 साल से अटके पड़े फ्लैट्स के निर्माण का खर्च जुटाए। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी लोकसभा चुनावों से पहले अटके पड़े फ्लैट्स के काम को पूरा करना चाहते हैं। इस ओर सरकार ने 1 साल पहले ही कदम बढ़ाने शुरू कर दिए थे।

बता दें कि जेपी इन्फ्राटेक, आम्रपाली और लोटस 3C की ग्रेनाइट गेट जैसी कंपनी इस वक्त दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही हैं। जिसके कारण इनके पास लोगों के हजारों फ्लैट्स फंसे हुए हैं। आम्रपाली ग्रुप के पास 43 हजार फ्लैट फंसे हुए हैं और 10 हजार नए फ्लैट बनाने के लिए जमीन खाली है। जेपी ग्रुप के पास 3,500 एकड़ खाली जमीन है। सूत्रों के अनुसार सुपरटेक, यूनिटेक और 3C ग्रुप के पास भी काफी जमीन खाली पड़ी है, जिसे विकसित किया जा सकता है।

सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अतिरिक्त रकम लागकर भी फ्लैट्स का काम पूरा किया जा सकता है। अटके फ्लैट्स की संख्या इसलिए बढ़ गई है क्योंकि एक ओर जहां बिल्डर पैसे जुटाने में असक्षम हैं, तो वहीं दूसरी ओर फ्लैट के निर्माण को लेकर होम बायर्स ने भी पेमेंट करना बंद कर दिया है।

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