पिछले 24 घंटों में सिर्फ 6 फीसदी बढ़े कोरोना के मरीज, रोजाना के आधार पर यह सबसे धीमी रफ्तार

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच थोड़ी राहत वाली खबर आई है। शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक (पिछले 24 घंटों) में कोरोना के नए मामलों में सिर्फ 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अभी तक औसत हर 9.1 दिन में मरीज दोगुने हो रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत में कोरोना के 100 मामले आने के बाद से यह रोजाना आधार पर दर्ज सबसे कम वृद्धि दर है। देश में 14 मार्च को कोरोना के मामले 100 के पार पहुंचे थे।

यानी 14 मार्च के बाद पहली बार देश में कोरोना की ग्रोथ रेट इतनी कम हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोनावायरस से अब तक कुल 24,942 केस सामने आ चुके हैं। इनमें 24 घंटों में 1,490 केस आने के साथ ही इतने समय में 56 मरीजों की मौत हो गई। अब तक 5,209 मरीज ठीक हो चुके हैं। फिलहाल देश में 18,953 एक्टिव केस हैं।

एक महीने पहले 25 मार्च को जब लॉकडाउन लागू किया गया था, उस समय भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 500 के आसपास थे। 24 मार्च को रोजाना औसत वृद्धि दर 21.6 पर्सेंट थी, जो अब घटकर 6 पर्सेट तक आ चुकी है। अगर 21.6 पर्सेंट की दर से मामले बढ़ते रहते तो अब तक पूरे देश में कोरोना के 2 लाख से ज्यादा केस सामने आ चुके होते। कोरोना वायरस पूरे देश की तुलना में सात राज्यों में तेजी से फैल रहा है।

आईआईटी दिल्ली की एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। इस लिस्ट में पहले नंबर पर गुजरात है। गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड का नंबर है। इन सात राज्यों में भारत के कुल मामलों में से दो तिहाई केस हैं। कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए केंद्र सरकार ने 59 हजार और वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया है। इससे कुछ दिन पहले करीब 40 हजार वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया गया था। शनिवार को यहां ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की 13वीं मीटिंग में यह जानकारी दी गई।

दिल्ली के बाद बिहार में भी प्लाज्मा थेरेपी को अपनाने की योजना बनाई जा रही है। आईसीएमआर से पटना एम्स में मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी देने की इजाजत मांगी गई है। वहीं, कर्नाटक और लखनऊ के केजीएमयू में शनिवार से यह तकनीक शुरू हो गई है। राजस्थान ने भी केंद्र से इसकी अनुमति मांगी है। दिल्ली में दो और मरीजों पर शुक्रवार को इसका टेस्ट किया गया।

नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वी के पॉल के अनुसार समय से लॉकडाउन करने और साथ ही तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करते हुए सर्विलांस करने की वजह से भारत में कोविड-19 पर काबू करने में आसानी हो सकी। उन्होंने कहा कि कोरोना का ग्राफ फ्लैट होना शुरू हो गया है। अगर देश भर में लॉकडाउन करने का फैसला नहीं किया जाता, तो अब तक कोरोना के मामले 1 लाख का आंकड़ा पार कर चुके होते। अब सरकार उस रणनीति पर काम कर रही है, जिस पर 3 मई को लॉकडाउन खत्म होने के बाद काम होगा।

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