पीएम की सुरक्षा में एसपीजी के अलावा लगे थे आईबी के 600 लोग, 50 शार्प शूटरों की थी भीड़ पर नजर

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आखिरी समय में ‘स्मृतिवन’ तक पैदल चलने के फैसले ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी थी। एसपीजी को भाजपा मुख्यालय में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैदल ही यह दूरी तय करेंगे और उनके साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय से परेशान एसपीजी ने तुरंत तैयारी की और बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के गुप्तचर तैनात कर दिए। सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टीम ने दोनों ही नेताओं को अपने घेरे में ले लिया। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) ने दिल्ली पुलिस के चुने हुए जवानों को सादी वर्दी और सफेद टोपी में कार्यकर्ताओं के तौर पर भीड़ में शामिल करा दिया। एसपीजी की एक स्पेशल टीम ने घेरा बनाकर दोनों नेताओं को उसके भीतर ले लिया।

दिल्ली पुलिस के जवान जिनको सादी वर्दी में तैनात किया गया था, उन्होंने एक मानव श्रृंखला बनाई जिसमें दोनों नेताओं के अलावा एसपीजी के जवान ही अंदर थे। एसपीजी ने स्मृति वन में सेना, नेवी और वायुसेना के जवानों के भी तैनात करा दिया। वहीं बहादुरशाह जफर मार्ग और आसपास के इलाके में शार्पशूटर तैनात किए गए थे, जो भीड़ पर लगातार नजर रखे हुए थे। वहीं एसपीजी के कहने पर शहीदी पार्क के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ मिनट के लिए गाड़ी के अंदर भी आ गए थे। इसके बाद दरियागंज सिग्नल पर पीएम मोदी फिर गाड़ी से बाहर आ गए।

राष्ट्रीय स्मृति स्थल की सुरक्षा को भी पांचों भागों में बांटा गया था। जिसकी जिम्मेदारी डीसीपी रैंक के अफसरों को दी गई थी। इसके बाद 12 जोन में बांटकर एसीपी तैनात किए गए। फिर जोन को 65 सेक्टर में बांटा गया और इनकी जिम्मेदारी इंस्पेक्टरों को दी गई। कुल 14 एसीपी, 67 इंस्पेक्टर, 233 उच्च और 1084 उसके नीचे का स्टाफ लगाया था। दिल्ली पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बलों और रिजर्व पुलिस की 9 कंपनियां तैनात की गई थीं।

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