प्रदर्शनकारियों को योगी की चेतावनी- ‘आजादी के नारे लगाए तो होगा राजद्रोह का केस’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदर्शन के नाम पर ”आजादी” का नारा लगाना राजद्रोह की तरह है। सीएम ने नए नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन की आलोचना करते हुए यह बात कही है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, “अगर कोई विरोध प्रदर्शन के नाम पर आजादी के नारे लगाएगा, तो यह देशद्रोह माना जाएगा और सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। लोग इसे स्वीकार नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा, “भारत की धरती से भारत के खिलाफ षड्यंत्र करने की अनुमति नहीं है।”

योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश की धरती पर मैं इस बात को कहूंगा…धरना प्रदर्शन के नाम पर कश्मीर में जो कभी आजादी के नारे लगते थे…अगर इस प्रकार के नारे लगाने का कार्य करोगे तो ये देशद्रोह की श्रेणी में आएगा और फिर इस पर कठोरतम कार्रवाई सररकार करेगी।”

‘महिलाओं को आगे करके पुरुष घर में सो रहे हैं…’

योगी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे प्रदर्शन के नाम पर उन महिलाओं और बच्चों को आगे कर रहे हैं, जिन्हें सीएए के बारे में कुछ भी नहीं मालूम है। उन्होंने कहा, ‘यह लोग खुद आंदोलन करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि इन्हें मालूम है कि अगर यह तोड़फोड़ करेंगे तो इनकी संपत्ति जब्त हो जाएगी। अब इन्होंने क्या किया है? अपने घर की महिलाओं को चौराहे चौराहे पर बैठाना प्रारंभ कर दिया है। बच्चों को (प्रदर्शन में) बैठाना शुरू कर दिया है। इतना बड़ा अपराध कि पुरुष घर में सो रहा है रजाई ओढ़कर और महिलाओं को आगे करके चौराहे चौराहे पर बैठाया जा रहा है।”

‘आने वाली पीढ़ी याद रखेगी….’

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना हर किसी का अधिकार है लेकिन अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है “हम उस व्यक्ति की संपत्ति से हुए नुकसान की वसूली करेंगे और उन्हें दंडित करेंगे ताकि आने वाली पीढ़ी इसे याद रखे।”

विपक्ष पर भड़के योगी

मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों का इस मुद्दे पर राजनीति करना साथ ही महिलाओं को जो सीएए का अर्थ भी नहीं जानती हैं उन्हें विरोध के लिए प्रेरित करना शर्मनाक है।” उन्होंने दावा किया, “इनके (विपक्षी दलों के) लिए देश महत्व‍पूर्ण नहीं है। इनके लिए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैनी और पारसी महत्वपूर्ण नहीं हैं। अब तो कांग्रेस के लिए ईसाई भी अहम नहीं रहे।”

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