प्रवासी मजदूरों को काम देने के लिए योगी सरकार का प्लान, 50 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

लखनऊ: लॉकडाउन (Lockdown) के चलते अन्य राज्यों से वापस आ रहे मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) लगातार काम कर रही है. योगी सरकार ने प्रदेश में मनरेगा के कामों को शुरू कर दिया है. सरकार का दावा है कि वह मनरेगा (MGNREGA) में रोजाना 25 लाख लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश मनरेगा में रोज़गार देने के मामले में अन्य सभी प्रदेशों से आगे है. मुख्यमंत्री ने मई के आखिर तक 50 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराने की बात कही है.

उन्होंने कहा, ‘हम प्रतिदिन 25 लाख लोगों को मनरेगा के माध्यम से रोज़गार दे रहे हैं. मेरा अनुमान है कि इस महीने के अंत तक हम इसे 50 लाख तक लेकर जाएंगे.’

उत्तर प्रदेश में लगभग 12 लाख प्रवासी मजदूर आ चुके हैं. सरकार का मानना है कि 10 लाख प्रवासी मजदूर अभी और आने वाले हैं. इस तरह 20-25 लाख तक प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश में आएंगे.

सरकार सभी मजदूरों का पूरा डाटा तैयार कर रही है. बाहर से आने वाले लोगों में ड्राइवर, प्लंबर, टेलर समेत अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले बहुत अच्छे कौशल के लोग हैं.

10,000 किमी सड़कों का काम
यूपी सरकार ने मनरेगा के तहत प्रदेश में 10,000 किलोमीटर लंबी सड़कें बनावाने का प्लान तैयार किया है. मजदूरों को काम देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग और रूरल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और सड़क निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण के लिए योजनाएं तैयार कर ली हैं.

तालाब और नहरों की खुदाई का काम
यूपी सरकार ने प्रवासी मजदूरों (Migrant workers) से मनरेगा के तहत तालाब और नहरों की खुदाई तथा गांवों की साफ-सफाई का काम कराया जा रहा है. अलीगढ़ जिले में MGNREGA के तहत धंतोली गांव के पास करवन नदी के कायाकल्प का काम किया जा रहा है. यहां 4 नदियों के कायाकल्प का काम किया जा रहा है. इसमें लगभग 8,000 मजदूर काम कर रहे हैं.

मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में पूरा ख्याल रखा जा रहा है.

प्रवासी राहत मित्र ऐप
उत्तर प्रदेश लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए योगी सरकार ने एक ऐप लॉन्च किया है. इसका नाम ‘प्रवासी राहत मित्र’ ऐप (Pravasi Rahat Mitra App) है.

‘प्रवासी राहत मित्र’ ऐप की मदद से मजदूरों का डेटा कलेक्ट कर भविष्य में उन्हें उनके कौशल के हिसाब से नौकरी और आजीविका प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी. सभी जिलों के डीएम की अगुवाई में डेटा कलेक्शन की जिम्मेदारी नगर विकास विभाग और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है.

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