पढ़िए कहानी: वैलेंटाइन डे

नीले आसमान में बादलों का झुरमुट लगा था। कोहरा गहरा गया था। सूरज की किरणों की आंख-मिचौली ने वातावरण को बहुत खुशनुमा बना दिया था। बारिश की बूंदें धीरे-धीरे जब बरसने लगीं, तो मौसम और भी सुहाना हो गया।
दिन में भी लाइटें जल उठी थीं। सारा बाजार टिमटिमाते बल्बों, रंग-बिरंगी झालरों और फूलों की खुशबू से महक उठा था। हर दुकान और हर गली आज सजी-धजी-सी नजर आ रही थी। युवाओं में एक अजीब-सी मस्ती और नशा था।
आकर्षक गिफ्ट्स व काड्र्स के इश्तिहार बाजार भर में छाए हुए थे। दैनिक अखबार भी रंग-बिरंगे इश्तिहारों व संदेशों से भरे पड़े थे। होटल्स व रेस्टोरेंट्स में आज कुछ विशेष ही साज-सज्जा थी। कहीं-कहीं तो डांस, म्यूजिक व सरप्राइज गिफ्ट्स का भी इंतजाम था।
नेहा रोजाना की तरह तैयार होकर ऑफिस के लिए निकली। गहरे गुलाबी रंग की साड़ी उसके गोरे रंग पर बहुत फब रही थी। मैचिंग के मोती के टॉप्स और कड़े गजब ढा रहे थे। सादगीपूर्ण सौंदर्य की वह मिसाल थी और उस पर उसका नपा-तुला सौम्य व्यवहार। ऑफिस में हर व्यक्ति उसका बेहद सम्मान करता था। पेशे से एमबीए नेहा एक फैक्ट्री में मैनेजर थी। एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ वह बेहद नरम दिल भी थी।
दिखावा, घमंड व चालाकी से कोसों दूर, वह अपना काम बेहद ईमानदारी और रुचि से करती थी। आज नियत समय से थोड़ा पहले आकर उसने अपनी सीट संभाल ली थी और इसका कारण था एक जरूरी मीटिंग। कंपनी के अन्य ब्रांचेज का स्टाफ भी उन्हीं के ऑफिस आ रहा था और सब व्यवस्था उसे ही देखनी थी।
कॉन्फ्रेंस हॉल में जाकर नेहा ने सारी व्यवस्थाएं देखीं। कुछ जरूरी निर्देश दिए और अपने केबिन में लौट आई। वह कुछ आवश्यक फाइलें देख ही रही थी कि अचानक नीरज आ गया। बड़ी गर्मजोशी से नीरज उससे मिला। नेहा ने कॉफी का ऑर्डर दे दिया।
नीरज और नेहा ने एमबीए एक साथ ही किया था। दिखने में स्मार्ट नीरज पढ़ाई और ऑफिस के काम, दोनों में ही होशियार था। एमबीए पूरा करने से पहले ही दोनों की नौकरी एक ही फर्म के अलग-अलग ब्रांचेज में लग गई थी। नीरज जितना आकर्षक था, उतना ही शौकीन भी। नेहा को अक्सर वह उसकी सादगी पर छेड़ता रहता था। दोनों अक्सर मीटिंग में मिलते रहते। समान पद होने के नाते सूचनाओं व समस्याओं का आदान-प्रदान भी होता रहता था। यदा-कदा नीरज नेहा की मदद भी कर देता और कभी-कभी तो नेहा को घर भी ड्रॉप कर देता था।
आज नीरज कुछ ज्यादा ही चहक रहा था। दोनों ने केबिन में बातें करते हुए कॉफी खत्म की और मीटिंग अटेंड करने पहुंचे। मीटिंग बहुत अच्छी तरह से संपन्न हुई। सभी नेहा की व्यवस्थाओं की तारीफ कर रहे थे। उसके द्वारा दी गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट की भी भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। नेहा बहुत खुश थी कि उसकी मेहनत सफल हो गई, तभी नीरज ने उसके सामने बाहर लंच करने का प्रस्ताव रख दिया।
‘ना’ की कोई गुंजाइश ही नहीं थी। मीटिंग में सिर्फ स्नैक्स ही सर्व हुए थे और मीटिंग की तैयारी के चक्कर में सुबह घर से जल्दी निकलने के कारण नेहा ने कुछ खाया भी नहीं था। उसने नीरज को सहमति दी और केबिन से पर्स उठाकर उसके साथ हो ली।
दोनों एक रेस्तरां पहुंचे। रेस्तरां गुलाब के फूलों से अटा पड़ा था। मधुर संगीत, परफ्यूम की खुशबू और ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’ के बैनर हर ओर लगे थे। ओहो! तो आज वैलेंटाइन डे है, नेहा ने सोचा इसीलिए बाजारों में इतनी रौनक है।
वेटर ऑर्डर लेने आ पहुंचा। नीरज ने जल्दी से ऑर्डर दिया और फिर बातचीत शुरू की। वह बोला, ‘आज तो बहुत सुंदर लग रही हो। सच नेहा, गुलाबी रंग तुम पर बहुत अच्छा लगता है।’
नेहा ने हंसते हुए ‘धन्यवाद’ कहा, तब तक वेटर ऑर्डर लेकर आ चुका था।
दोनों ने खाना शुरू किया। इधर-उधर की बातों के बीच अचानक नीरज गंभीर हो गया। उसने नेहा का हाथ थामा और जेब में से एक डिबिया निकालकर उसके हाथ पर रखकर भावुक होकर बोला, ‘नेहा, विल यू बी माई वैलेंटाइन?’
नेहा अचानक असहज हो उठी, ‘अरे, अचानक तुम्हें क्या हुआ? और यह क्या है?’ उसने डिबिया खोलकर देखी। एक बेहद खूबसूरत हीरे की अंगूठी थी।
‘पहनो ना, देखें तुम्हें ठीक आती है या नहीं।’ नीरज बोला।
‘नहीं, मैं इसे नहीं ले सकती।’ नेहा कसमसाई।
‘प्लीज, मेरी खातिर…’ नीरज ने आग्रह किया।
‘पर…मैं इतना महंगा गिफ्ट कैसे ले सकती हूं?’ नेहा असहज हो रही थी।
आखिर नेहा को नीरज के आग्रह के आगे झुकना पड़ा और उसे अंगूठी पहननी पड़ी। अंगूठी उसके नाजुक हाथों में बहुत जंच रही थी। वापसी में सारे रास्ते नीरज प्यार भरी बातें करता रहा। उसकी बातों में चंचलता, शोखी और शरारत सभी कुछ था। नीरज तो नेहा को ऑफिस के बाहर छोड़कर चला गया, पर नेहा, वह तो जाने किस सोच में पड़ गई थी?
नीरज को वह काफी सालों से जानती थी। थोड़ा नटखट तो वह था, पर नेहा के धीर-गंभीर स्वभाव को देखते हुए उसने कभी उसके साथ मस्ती नहीं की थी, फिर वह भी नेहा के स्वभाव को अच्छी तरह जानता था। पर आज यह अचानक नीरज को क्या हुआ?
प्रणय निवेदन का ऐसा तरीका? नेहा जानती थी कि नीरज शादीशुदा था, फिर यह तोहफा किसलिए? ऑफिस में बैठी नेहा यही सोच रही थी कि क्या स्त्री और पुरुष मात्र दोस्त, सहकर्मी या सिर्फ परिचित नहीं हो सकते? क्या प्लेटोनिक लव कहीं भी नहीं है? आज जब स्त्री-पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं, तो क्या किसी परपुरुष के साथ बातें करने, खाना खा लेने या साथ घर चले जाने से उसे इतनी छूट मिल जाती है कि वह उससे अमर्यादित व्यवहार करे?
क्या पुरुष के लिए स्त्री सिर्फ शरीर व सुंदरता है? हमने पश्चिम के त्योहारों और दिवसों को तो अपना लिया, पर क्या पश्चिमी देशों जैसे आधुनिक हम हो पाए हैं? ‘वैलेंटाइन डे’ तो ‘सेंट वैलेंटाइन’, जिन्होंने प्रेम के नाम पर शहादत दी थी, उनके प्यार के पैगाम को नमन करने के लिए मनाया जाता है। इसे वासना के बहाने से किसी के भी सम्मुख इजहार करना या मन में दबी हुई भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बनाना कहां तक उचित है?
हिंदुस्तानी संस्कृति में तो पति-पत्नी का सात जन्मों का साथ होता है। ऐसे में ब्याहता पत्नी के होते हुए वह किसी और से प्रणय निवेदन करे, इसका क्या मतलब? होती होंगी कुछ कॅरियर ओरिएंटेड लड़कियां, जो इस तरह की हरकतों से तरक्की की सीढिय़ां चढ़ती होंगी, पर वह, उसे तो अपने स्वाभिमान को गिरवी रखना बिल्कुल पसंद न था।
और नीरज…? उसे तो वह अपना दोस्त समझती थी। पर वह भी और पुरुषों की तरह ही निकला। नेहा को नीरज से घृणा-सी हो गई। उसने झट से हाथों से अंगूठी निकाली और डिबिया में रखकर पर्स में रख ली।
शाम तक काम में नेहा का मन नहीं लगा। बार-बार उसे ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसे भरे बाजार में बेइज्जत कर दिया हो। फिर कुछ सोच वह मुस्कुराती हुई केबिन में से निकली। उसकी अधरों पर मुस्कान थी और मन निश्चिंत।
उसने सीधे अपनी कार नीरज के घर के सामने पार्क की। नीरज की पत्नी ने दरवाजा खोला। उसकी पत्नी को देख नेहा को सुखद आश्चर्य हुआ। वह काफी सुंदर थी। बातों-बातों में नेहा ने वह अंगूठी नीरज की पत्नी को नीरज का वैलेंटाइन डे का तोहफा बताकर दे दी।
यह सरप्राइज गिफ्ट नेहा के हाथों पाकर वह असमंजस में थी।
‘नीरज ऑफिस में व्यस्त हैं और उन्हें आने में भी देर हो जाएगी और फिर लेडीज की पसंद की उन्हें उतनी समझ नहीं कहकर उन्होंने मुझसे ही अंगूठी भिजवा दी।’ इतना कहकर नेहा ने नीरज की पत्नी से इजाजत मांगी और फिर आने का वादा करके वहंा से चली आई।
घर आकर नेहा ने नीरज को फोन लगाया और उसे बताया कि वह उसकी दी हुई अंगूठी उसकी पत्नी को दे आई है, क्योंकि उसकी असली हकदार वही है। दूसरी तरफ से जब चुप्पी नहीं टूटी, तो नेहा ने आगे कहा कि नीरज उसका अच्छा दोस्त है और हमेशा रहेगा और वो उसकी दोस्ती खोना नहीं चाहेगी। नीरज समझ चुका था।
दूर कहीं फिजा में गूंज रहा था ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’।

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