फ्री हैंड के अभाव से जूझता कटे हाथ वाला ठाकुर

इंतजार हमेशा खले, यह जरूरी नहीं है। लेकिन कभी-कभी बेसब्री का भाव तांडव करते हुए हावी होने लगता है। अब शिवराज सिंह चौहान आज भी वाकई टाइगर जितना दम रखते हैं या नहीं, यह गुरूवार को अपने आप पता चल जाएगा, लेकिन अपना दिल है कि मानता नहीं। वह इसी उधेड़बुन में लगा हुआ है कि गुरूवार को शिवराज के हिस्से कितना अमृत आएगा और कितना विष। मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि मंथन के बाद अमृत बंट जाता है और विष तो शिव को ही पीना पड़ता है। मंथन तो गए कई दिनों से चल रहा है, राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए

लम्बी खींचतान के बाद गुरूवार को होना तय हुआ तो शिवराज के इस बयान ने खलबली मचा दी है। खबर है कि मुख्यमंत्री ‘फ्री हैंड’ के अभाव से जूझ रहे हैं। उनकी हालत कैलाश विजयवर्गीय वाले उसी ‘ठाकुर के कटे हाथ’ जैसी कर दी गयी है, जिसकी पीड़ा का इजहार कैलाश ने खुद शिवराज से दुखी होकर ही किया था। वह शिवराज का बतौर मुख्यमंत्री तीसरा कार्यकाल था। वह असीमित अधिकार और शक्तियों के स्वामी थे। लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है। चौथी पारी में कहा जा रहा है कि शिवराज के छक्के छूटने लगे हैं।

खासतौर पर मंत्रियों के चयन में प्रदेश संगठन उनसे खींचतान में लगा है और आलाकमान उनकी बात को खास तवज्जो नहीं दे रहा है। उनकी पसंद के कुछ खास विधायक मंत्री नहीं बनाये जा रहे हैं, जबकि उनकी नापसंदगी को भी महत्व न देते हुए कुछ मंत्रियों का चयन कर लिया गया है। राम तो विभीषण की मदद से रावण के वध के बाद उसे राजपाट सौंपकर अयोध्या लौट आये थे। यहां यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। सत्ता रूपी सुंदरी के लगातार चौथी बार वरण में इस मर्तबा शिवराज गच्चा खा गए दीखते हैं। मंत्रिमंडल में शिवराज की कितनी चली, यह कल दिख ही जाएगा।

लेकिन कुछ बातें तय हैं। वह यह कि यदि उनकी बात न सुनी गयी, तब भी शिव पूरी खामोशी के साथ यह जहर भी गले उतार लेंगे। यह उनकी आदत की एक खूबी कहा जा सकने वाला हिस्सा है। शिवराज वह राजनेता हैं, जो पूरी तन्यमयता के साथ भी यह त्याग कर देंगे। खुद को साइड लाइन किए जाने की सूरत में भी वह कम से कम प्रकट रूप से तो उफ नहीं ही करेंगे। हां, लेकिन फिर होगा यह जरूर कि प्रदेश में सरकार का चेहरा बदला दिखने लगेगा।

‘माई का लाल’ वाले चौथे कार्यकाल में शिवराज पूरी तरह मगरूर सरकार चला रहे थे, अब शायद वह मजबूर सरकार चलाने के लिए खुद को तैयार कर चुके हैं। हालांकि यह किसी से छिपा नहीं है कि मेहनत करने के साथ चौहान किस्मत के धनी हैं। ऊपर वाले ने अक्सर उन्हें छप्पर फाड़ के ही दिया है। आज जो कुछ होता दिख रहा है, उस पर शिवराज तब से पीड़ा जता रहे हैं, जबकि पार्टी में निश्चित ही उन्होंने शक्तिशाली कद हासिल कर लिया है। यह मुकाम उन्होंने किसी से छीना नहीं। कही भाग्य तो कभी कर्म के चलते उनके लकीर लगातार दूसरों के मुकाबले बड़ी होती चली गयी। हो सकता है कि अब उनके सूर्य का कुछ मद्धम होता पक्ष दिख जाए, लेकिन वह शिवराज कभी मद्धम नहीं होने पाएंगे, जो दो कदम आगे बढ़ने के लिए एक कदम पीछे हटने वाले हुनर को अपनी राजनीति का प्रमुख दांव बनाकर रखते है। अब बाकी बातें, गुरूवार को मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद…..

प्रकाश भटनागर/webkhabar से साभार

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