फ्लैट हो वास्तु अनुरूप

महानगरों के साथ ही अब छोटे शहरों में भी फ्लैट में रहने का चलन बढऩे लगा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि अब जमीन की कमी हो चुकी है और मकानों की डिमांड बढ़ रही है, इसलिए फ्लैट ही एकमात्र विकल्प रह जाता है। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने वाले बिल्डर अक्सर दावा करते हैं कि उनके फ्लैट वास्तुशास्त्र के अनुरूप बने हैं, लेकिन उन दावों में कितनी सच्चाई है यह कोई जानकार ही बता सकता है।

फ्लैट में अगर वास्तु दोष है, तो उसमें रहने वालों पर उसका विपरीत असर पडऩा तय है। हालांकि वास्तु दोष दूर करके आप अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं। इसके लिए यह भी जरूरी नहीं कि किसी वास्तुशास्त्री की सलाह ही ली जाए, आप खुद भी कुछ बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं।

ध्यान रखें कि मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का निर्माण भूमि की चारों दिशाओं में कुछ फीट खाली स्थान छोड़कर किया गया हो। उत्तर व पूर्व की ओर अधिक और दक्षिण व पश्चिम की ओर कम खाली स्थान छोडऩा चाहिए। इसके अलावा बिल्डिंग का मेन गेट पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। साथ ही अपार्टमेंट का रंग काला, आसमानी या लाल नहीं हो।
मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में पार्किंग की जगह ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होनी चाहिए।
किचेन आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) या दक्षिण दिशा में होना चाहिए।
लिफ्ट है, तो उसके पास ही सीढिय़ां होनी चाहिए और वह घड़ी की सूई की दिशा में ऊपर की ओर जानी चाहिए। इसके अलावा पानी की टंकी ईशान कोण में होनी चाहिए।
बिल्डिंग के प्रत्येक फ्लैट में रोशनदान, खिड़की और दरवाजों की संख्या सम (2, 4, 6) होनी चाहिए।
फ्लैट में टॉयलेट, बाथरूम दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए।

उपाय-

फ्लैट में वास्तु यंत्र की स्थापना करें। इसके लिए पूर्वी दिशा, जहां से सुबह सूर्य की किरणें घर में आती हों, उस जगह क्रिस्टल बॉल रखें, ताकि उस पर सूर्य की किरणें पड़ें और उसका प्रकाश पूरे फ्लैट में फैले।
पूरे घर में नमक के पानी का पोछा लगाएं। घर के पूजा स्थान को हमेशा साफ-स्वच्छ रखें।
विंडचाइम्स भी निगेटिव एनर्जी को खत्म करने में सहायक मानी जाती हैं। ज्यादा तेज आवाज न करने वाली विंडचाइम्स अपने फ्लैट के मुख्य दरवाजे के बाहर लटकाएं।
यदि फ्लैट के बाहर डस्टबिन रखा है, तो इसे तुरंत वहां से हटा दें, क्योंकि यह वास्तु दोष से उत्पन्न होने वाले प्रभावों को बढ़ा देता है।
अपने फ्लैट के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ तुलसी के दो पौधे रखें। इससे जो क्षेत्र पहले निगेटिव एनर्जी उत्पन्न कर रहा था, वह भी पॉजिटिव एनर्जी का स्रोत बन जाएगा।

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