बनें मोबाइल ऐप डेवलपर

लखनऊ: मोबाइल आज हर किसी की जरूरत बन गया है और इंटरनेट की कम कीमतों ने लोगों को एक नई दुनिया से जोड़ दिया है। ऐसे में सबसे ज्यादा जिस चीज की डिमांड बढ़ी है वह है मोबाइल ऐप की। इस सेक्टर में लोगों की बढ़ती मांग ने रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। आप भी मोबाइल ऐप डेवलपर बनकर कैसे कॅरियर बना सकते हैं, बता रहे हैं विनीत कुमार वर्मा

मोबाइल के लगातार बढ़ते इस्तेमाल से अब शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके लिए मोबाइल ऐप नहीं बना हो। इनके जरिए ऐप यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार कंपनियों को आर्डर देते हैं और इसी के माध्यम से सेवाओं और उत्पादों की खरीदारी एवं धनराशि का भुगतान भी हो जाता है। इन ऐप्स के माध्यम से बहुत से कार्य बिना किसी तरह की तकलीफ उठाए हो जाते हैं। इनके चलते केवल समय ही नहीं, धन की भी बचत होती है। ई-कॉमर्स से जुड़ी कंपनियों ने तो अब अपनी वेबसाइट की बजाय सिर्फ ऐप के जरिए ही यूजर्स को सेवाएं देना शुरू कर दिया है। शिक्षा संस्थान और बड़े-बड़े संगठनों के लिए भी ऐप विकसित करना जरूरत बन चुका है। वैसे भी दुनियाभर में डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले काफी समय तक मोबाइल ऐप्स के विशेषज्ञों की मांग बनी रहेगी। भारत जैसे विकासशील देश में तो अभी इसकी शुरुआत भर ही है। फिलहाल बहुराष्ट्रीय और शीर्ष देसी कंपनियां ही मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन वह समय दूर नहीं जब छोटी कंपनियों को भी स्पर्धा में बने रहने के लिए इस तकनीक का सहारा लेने को बाध्य होना पड़ेगा।

क्या है मोबाइल ऐप : ऐप एक प्रकार से छोटा कंप्यूटर प्रोग्राम होता है, जो मोबाइल फोन, टैबलेट अथवा घडिय़ों में चलाया जाता है। हर ऐप का खास तरह का लक्षित कार्यकलाप होता है। उदाहरण के लिए हेल्थकेयर, शॉपिंग, गेम्स आदि। कई ऐप्स तो मोबाइल फोन के साथ ही आते हैं, जबकि अन्य ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर इंस्टाल किया जा सकता है। अगर आप भी इस फील्ड में जाना चाहते हैं, तो विभिन्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का जानकार होना सबसे पहली शर्त है। इनमें ऑब्जेक्टिव सी, सी++, जावा आदि प्रमुख हैं। शुरुआत जावा प्रोग्रामिंग लैंग्वेज से करनी चाहिए। कई कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के डिग्रीधारकों को ही जॉब के लिए आमंत्रित किया जाता है। कंप्यूटर साइंस की बैकग्राउंड वाले युवा भी इस सेक्टर में आ सकते हैं।

इस सेक्टर में सफल होने के लिए टेक्निकल होने के साथ सृजनात्मक सोच होना भी बहुत जरूरी है। कंज्यूमर और कंपनी दोनों की जरूरतों को समझते हुए मोबाइल ऐप को डिजाइन करना पड़ता है। इसके लिए अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर जाकर प्रस्तावित ऐप की कार्यविधियों को समझने की जरूरत पड़ती है, अन्यथा एक छोटी-सी गलती समूचे ऐप को बर्बाद कर सकती है। उपभोक्ता अक्सर किसी भी नई तकनीक को अपनाने में हिचकता है। इसके पीछे आमतौर पर कारण होता है, असुविधा की आशंका। डेवलपर के लिए यह भी एक चुनौती होती है कि कैसे इसे अधिक से अधिक सुविधाजनक बनाया जाए। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि तकनीकी कुशलता के साथ मानवीय पहलुओं से भी भलीभांति परिचित होना इस तरह के काम में सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक है।

कार्यशैली : मोबाइल ऐप डेवलपर का मुख्य कार्य कंपनियों की जरूरत के अनुसार ऐप को विकसित करना है। इसके लिए वह लगातार कंपनी के अधिकारियों से फीडबैक लेते रहते हैं और उनके अनुरूप सही तरह के ऐप को निॢमत करते हैं। ऐप के कारगर होने की जांच एवं पुष्टि की जिम्मेदारी भी उन पर ही होती है। ऐप के क्रियान्वयन में आने वाली किसी भी प्रकार की समस्या का निदान करने के लिए उनकी ही सेवाएं ली जाती हैं। जहां तक नौकरी की बात है, तो मोबाइल ऐप डेवलपिंग से जुड़ी कंपनियां इस क्षेत्र के एक्सपट्र्स को अपने यहां रखती हैं। कई कंपनियां सीधे भी अपने ऐप्स को तैयार करने के लिए इन डेवलपर की नियुक्त करती हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग भी की जा सकती है। इस सेक्टर में बढ़ती डिमांड के कारण सैलरी भी अच्छी मिलती है। वैसे फिलहाल मोबाइल ऐप बनाना काफी महंगा है, जल्द ही इस खर्च में कमी आएगी।

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