बन गयी फ़िल्मी कहानी, 19 बरस बाद मिला बेटा

लखनऊ : फिल्मों में तो आपने अक्सर बेटे-बेटियों के बिछड़ने और फिर कई सालों बाद उने मिलने की कहानी देखी होंगी, लेकिन रियल लाइफ में ऐसा कम ही होता है। हालांकि इलाहाबाद के कर्नलगंज निवासी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रिटायर्ड कर्मचारी अवधेश मिश्रा के ऐसा ही हुआ है। 19 बरस पहले उनका 6 साल का बेटा आकाश घर से लापता हो गया था।

काफी तलाश करने के बाद भी जब कई महीनों तक आकाश का कोई पता नहीं चला, तो परिवारवालों ने बेटे को तलाशने की कोशिशें भी बंद कर दीं। लेकिन एक चीज, जो इन 19 सालों में कभी रुकी नहीं, वह थी ईश्वर से प्रार्थना। अवधेश बताते हैं कि उनके पड़ोस में रहने वाले विंध्यवासिनी तिवारी मंफोर्डगंज निवासी एक इंजीनियर के साथ काम करते हैं। इंजीनियर का मकान उसी जगह है, जहां उनके बेटे आकाश को अपना बेटा होने का दावा करने वाले विनोद अग्रहरि का परिवार रहता है। विंध्यवासिनी का वहां आते-जाते आकाश से संपर्क हो गया। एक दिन डांट-डपट के बाद वह दिनभर भूखा रहा।

मिलने पर विंध्यवासिनी ने कारण पूछा तो उसने कहा कि असली मां-बाप होते तो शायद कभी भूखा ना रहने देते। तभी पता चला कि छह साल की उम्र में ही वह अपने मां-बाप से बिछड़ गया था। घर का पता तो नहीं बता पाया लेकिन जिस तरह की लोकेशन बताई, वह उनके मकान से बिल्कुल मेल खाती थी। विंध्यवासिनी के बताने पर एक दिन आकाश खुद घर पहुंच गया। जिसे देखकर एकबारगी तो उन्हं अपनी आंखों पर भी विश्वास नहीं हुआ। लेकिन फिर कपड़े, चोट के निशान और बचपन की तस्वीरें आदि दिखाने पर यकीन हो गया कि वह हमारा ही बेटा है।

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