बीजेपी-जदयू के बीच राजनीतिक रार के बीच नीतीश पर कांग्रेस का हमला

दिल्ली ब्यूरो: यह बात और है कि पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में जदयू मुखिया नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ बने रहने का ऐलान किया है लेकिन सीट बंटवारे को लेकर दोनो पार्टी के नेता अभी भी जुबानी जंग लड़ते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि अमित शाह और नीतीश कुमार की बैठक के बाद सीटों की राजनीति पर बिरामलग जाय। 12 जुलाई को यह बैठक पटना में होने की संभावना है। इसी बीच कांग्रेस ने नीतीश कुमार पर बड़ा हमला किया है और अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा है कि महागठबंधन में सीएम नीतीश कुमार के लिए कोई जगह नहीं है। उनके इस बयान ने जेडीयू के रुख को नरम कर दिया है। बता दें कि जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव ने कांग्रेस को सुझाव दिया था कि उन्हें लालू प्रसाद यादव की आरजेडी से गठबंधन पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता ने साफ शब्दों में कहा कि नीतीश कुमार के लिए अब महागठबंधन में कोई जगह नहीं है।

बता दें कि कांग्रेस के इस बयान से पहले जेडीयू ने फिर से महागठबंधन में शामिल होने की बात पर कांग्रेस के लिए एक शर्त रखी थी। जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर अपना रूख जाहिर करते हुए कांग्रेस को पहले आरजेडी से अलग हो जाने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि पार्टी तब तक कांग्रेस से बात नहीं करेगी, जब तक वह आरजेडी से अपने रिश्ते समाप्त नहीं कर लेती।

गोहिल ने कहा कि हमें सुझाव देने से बेहतर है कि नीतीश कुमार और उनकी पार्टी आत्मविश्लेषण करें और देखें कि उन्होंने अपना क्या हाल बना लिया है। इतना ही नहीं, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी ने ये भी कहा कि आरजेडी से हमारे रिश्ते काफी पुराने हैं। इसमें पुनर्विचार का सवाल ही नहीं उठता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस के इस बयान के बाद जेडीयू क्या स्टैंड लेती है।

गौरतलब है कि दिल्ली में जदयू राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जेडीयू ने फिलहाल एनडीए में शामिल रहकर आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन सीट बंटवारे के वर्चस्व को लेकर दोनों दलों में अभी भी सस्पेंस बरकरार है। दोनों पार्टी के नेताओं के बीच जुबानी जंग भी काफी तल्ख हो गए हैं। सीएम नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में बीजेपी को अपना तेवर दिखाते हुए कहा कि हमारी अनदेखी करने वाले खुद नजरअंदाज हो जाएंगे।

नीतीश के इस बयान का एक साथ कई मतलब निकाले जा रहे हैं। नीतीश कुमार कई बार ये स्पष्ट कर चुके हैं कि वो सत्ता में रहें या जाएं, लेकिन कभी भी साम्प्रदायिक शक्तियों से समझौता नहीं करेंगे। इधर, गिरिराज सिंह द्वारा नवादा में दंगे के आरोपी से मिलने पर सीएम नीतीश ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर सीट बंटवारे का मामला नहीं सुलझता है तो नीतीश कुमार साम्प्रदायिकता की दुहाई देकर एनडीए से खुद को अलग कर सकते हैं।

अब देखना होगा कि अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति किस ओर करवट लेती है। एक बात तो तय है कि एनडीए के अन्य सहयोगी दल लोजपा और रालोसपा ने जिस तरीके से सीट को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, उसे देखते हुए इन मामलों को आसानी से निपटाना अमित शाह के लिए भी आसान नहीं होगा।

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