बुंदेलखंड : पानी के अभाव में सेप्टिक टैंक बनें वाटर टैंक

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान देश और मध्य प्रदेश में चाहे जितना सफल रहा हो, मगर बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह अभियान जल संग्रहण के लिए वरदान बन गया है, क्योंकि जल संकट से जूझते लोगों ने यहां शौचालय के सेप्टिक टैंक को वाटर टैंक में बदल लिया है लेकिन इसके साथ ही वह खुले में शौज जाने पर मजबूर हैं।

बुंदेलखंड इन दिनों जल संकट से जूझ रहा है, पानी के अभाव में गांव के गांव खाली हो गए हैं। कई जगह तो लोगों ने पानी संग्रहण के तरह-तरह के तरीके खोज निकाले हैं। टीकमगढ़ जिले के पलेरा विकासखंड के परा गांव में जाकर इस बात की पुष्टि हो जाती है कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है, क्योंकि यहां स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय के बनाए गए टैंक इन दिनों पानी टैंक में बदल गए हैं।

लगभग चार हजार की आबादी वाले इस परा गांव में तालाब, कुआं और हैंडपंप हैं, मगर अब वह सिर्फ नुमाइशी बनकर रह गए हैं। तालाब मैदान में बदल चुके हैं, कुओं में पानी नहीं है और हैंडपंपों ने काम करना बंद कर दिया है। इस स्थिति में पानी के टैंकरों का लोगों को सहारा लेना पड़ रहा है।

परा गांव की कुसुम देवी रैकवार बताती हैं, “पानी बड़ी समस्या बन गया है। कई किलोमीटर दूर से पानी लाना होता है। कई बार तो पानी खरीदना होता है, ऐसे में टैंकर के पानी को शौचालय के टैंक में भर लेते हैं, क्योंकि इतने बर्तन ही नहीं हैं कि टैंकर के पानी को उनमें भरा जा सके। ऐसे में सेप्टिक टैंक को पानी का टैंक बना लिया है क्योंकि शौचालयों का उपयोग नहीं कर रहे हैं इसलिए शौचालय के टैंक साफ सुथरे हैं।”

गांव का चौकीदार हरिचरण बताता है, “गांव में पानी के सभी स्रोत सूख चुके हैं, मीलों का रास्ता तय करने के बाद पानी मिल पाता है। इसके चलते खरीदे गए पानी को शौचालय के टैंक में भर लेते हैं, जो कई दिन तक चलता है और उसका उपयोग सहेज- सहेज कर लोग करते हैं।”

इसके चलते उन्हें भले ही खुले में शौच को जाना पड़ रहा है। इस इलाके में जल संकट समय गुजरने के साथ विकरालतम रूप धारण करता जा रहा है। इंसान तो छोड़िए मवेशियों के पीने तक के लिए पानी नहीं है। गांव के एक किसान दिलीप तिवारी बताते हैं, “पीने को पानी मिल जाता है तो नित्य क्रिया के लिए बड़ी समस्या है। नहाने को पानी मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में बड़ी मशक्कत कर पानी का संग्रहण कर रहे हैं। शौचालय का उपयोग न करके उसके टैंक में पानी भर रहे हैं और शौच के लिए बाहर जाते हैं। टैंक में भरा पानी कई दिन तक चल जाता है।”

जिलाधिकारी अभिजीत अग्रवाल ने जिले को जलअभाव ग्रस्त जिला घोषित किए जाने के साथ पेयजल के बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए हैं। साथ ही नलकूप खनन पर रोक लगा दी है और पानी के व्यावसायिक उपयोग भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

जल संकट से जूझते बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश के छह और उत्तर प्रदेश के सात जिले आते हैं। इनमें से कई जिले ऐसे हैं, जहां लोगों ने शौचालय के लिए बनाए गए टैंकों का इस्तेमाल पानी के टैंक के तौर पर करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी का स्वच्छ भारत अभियान बुंदेलखंड में स्वच्छता के लिए उतना कारगर भले ही न हुआ हो, जितना पानी के संग्रहण के लिए कारगर हुआ है।

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