भक्तों के प्रेम में अत्यधिक स्नान से बीमार हुए भगवान, एक पखवाड़े तक लेंगे काढ़ा

वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी में नाथों के नाथ भगवान जगन्नाथ भक्तों के प्रेम में अत्यधिक स्नान से बीमार पड़ गये। भगवान अब एक पखवाड़े तक विश्राम कर प्रतीक रूप से काढ़ा का भोग पीकर स्वास्थ्य लाभ लेंगे। मौसम में परिवर्तन के दौरान इंसान ही नहीं बल्कि जगत के पालनहार भगवान जगन्नाथ भी बीमार पड़ते हैं। सुनने में भले ही ये आपको अजीब भले ही लगे लेकिन काशी में ऐसा होता है। धर्म नगरी काशी में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान जगन्नाथ की जलाभिषेक की परम्परा है।

भक्तों के प्यार में भगवान इतना स्नान कर लेते हैं कि बीमार पड़ जाते हैं। इसके बाद वे पूरे पद्रह दिनों के लिए बुखार में तपते रहते हैं। इसके लिए वैद्य की सलाह पर उन्हें आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है। जिसके बाद वो स्वस्थ होकर रथयात्रा मेले के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। धर्मनगरी में सैकड़ों साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करने श्रद्धालु गुरुवार सुबह से ही अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में जुटने लगे। भक्तों ने अपने हाथों से प्रभु जगन्नाथ को रच रच कर गंगाजल से स्नान कराया।

ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर गुरूवार को अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में परम्परानुसार भगवान जगन्नाथ की जलयात्रा का आयोजन किया गया। गुरूवार सुबह लगभग 05.15 बजे भगवान जगन्नाथ, भईया बलभद्र व बहन सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाओं को मंदिर की छत पर ले जाकर विधि विधान से श्रृंगार किया गया।

इसके उपरांत मुख्य ट्रस्टी आलोक शापुरी व दीपक शापुरी ने मंदिर के पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय की मौजूदगी में गंगाजल से भगवान को स्नान कराकर जलयात्रा शुरू की। इसके उपरांत कतार बद्ध भक्तों ने अपने हाथों से भगवान को गंगाजल से स्नान कराया। और भगवान को मिष्ठान, फल-फूल अर्पित कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। भगवान भी भक्तों के श्रद्धारूपी प्रेम में जमकर स्नान करते रहे। यह सि​लसिला रात 10 बजे तक चलेगा। इसके बाद भगवान के विग्रहों को पुन: गर्भगृह में लाया जायेगा। जहां अत्यधिक स्नान के कारण भगवान प्रतीक रूप से बीमार पड़ गये।

मंदिर के पुजारी राधेश्याम पाण्डेय ने बताया कि भगवान एक पखवारे तक भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। शुक्रवार से भगवान को काढ़े का भोग लगाया जाएगा। स्वस्थ होने के बाद भगवान पुन: दर्शन देंगे। इसके बाद मंदिर से भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा निकाली जाएगी। इसी के साथ काशी का विश्व विख्यात रथयात्रा मेला शुरू हो जाएगा।

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