भूख का कोई धर्म नहीं होता, रोज सैकड़ों लोगों की भूख मिटाता है ये शख्स

रोटी जिस पर सबका अधिकार है, कई बार लोग खाने के एक दाने के लिए भी मोहताज हो जाते हैं। आपने भी कई बार सुना होगा भूख का कोई धर्म या मजहब नहीं होता। लेकिऩ इस लाइन का सही अर्थ हैदराबाद सैयद उस्मान अजहर मकसुसी ने समझा। अजहर रोज 300 से 400 लोगों की भूख मिटाते हैं। फ्लाईओवर के नीचे थालियां लेकर चटाई पर बैठे बेघर, भिखारी, कचरा बीनने वाले और मजदूर को रोज दोपहर अजहर के आने का इंतजार करते हैं। जैसे ही 12:30 बजते हैं, अजहर वहां आते हैं और सबकी थाली में गरम-गरम चावल और दाल परोसना शुरू कर देते हैं।

हैदराबाद के दबीरपुरा फ्लाईओरवर के पास रोज यह नजारा 2012 से देखा जा रहा है। ऐसा एक भी दिन नहीं गुजरता है जब शहर के इस फ्लाईओवर के नीचे खड़ी इस भीड़ को दोपहर का खाना नहीं मिलता हो और यह आदमी उन्हें भोजन नहीं परोसता हो। अजहर ने भूखों और जरूरतमंदों की भूख मिटाना अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है। उनका केवल एक नारा है- भूखों का कोई मजहब नहीं होता है। अजहर का मानना है कि ,भूख का कोई मज़हब नही होता। रोटी पर सबका बराबर अधिकार है, फिर इससे कोइ फर्क नहीं पड़ता की वो किस धर्म ,जाती या सम्प्रदाय का है।

बचपन में खुद किया भूख की पीड़ा का अनुभव

अजहर कहते हैं कि मुझे छोटी सी उम्र से बहुत सारे बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। मैं जब सिर्फ चार साल का था, मेरे पिता का निधन हो गया। पैसों के अभाव में कई दिन मैं और मेरा परिवार भूखे सोते थे। बाद में मैंने काम करना शुरू कर दिया। उन दिनों मैंने भूख की पीड़ा का अनुभव किया। इसी फ्लाईओवर के नीचे छह साल पहले एक दिन उन्हें एक बेघर औरत मिली, जिनसे भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू करने की प्रेरणा मिली। अजहर ने उस वाकये को याद करते हुए कहा, लक्ष्मी भूख से छटपटा रही थी। वह विलख-विलख कर रो रही थी। मैंने उसे खाना खिलाया और तभी फैसला किया कि मेरे पास जो सीमित संसाधन है, उससे मैं हरसंभव भूखों की भूख मिटाऊंगा।

प्रतिदिन 300-400 लोगों को कराते हैं भोजन

बकौल अजहर मैंने पहली बार सात साल पहले डेबेरपुरा इलाके में मुफ्त भोजन वितरित करना शुरू किया था और यह लगभग तीन वर्षों तक जारी रहा। बाद में कुछ लोगों ने किराने का सामान देकर मदद करना शुरू कर दिया। मैंने कार्यक्रम का विस्तार किया और चार साल पहले गांधी जनरल अस्पताल में भी भूखों को खाना खिलाने का काम शुरू कर दिया। गांधी अस्पताल और दबेरपुरा इलाके में रोजाना तीन से चार सौ लोग भोजन करते हैं।

इतना ही नहीं अजहर ने अब इस पहल को अन्य राज्यों में भी बढ़ा दिया है। वह बताते हैं ‘मैंने इस कार्यक्रम को बेंगलुरु, रायचूर, तंदूर, झारखंड और असम जैसे अन्य राज्यों में बढ़ा दिया है। इन सभी जगहों पर हम मुफ्त भोजन वितरण करते हैं, जिसकी मदद से 1000-1200 लोगों को दैनिक भोजन मिलता है। मैं इस कार्यक्रम को और भी बढ़ाना चाहता हूं। गरीब लोगों की मदद करने से मुझे खुशी और संतुष्टि मिलती है।

बिग बी से लेकर सलमान तक कर चुके हैं सम्मानित

बता दें कि बॉलीवुड अभिनेता सलमान ने अपने कार्यक्रम ‘बीइंग ह्यूमन’ में हिस्सा लेने के लिए मुंबई बुलाया था। उनका चयन देशभर के छह ऐसे लोगों में किया गया था, जो वास्तविक जीवन में हीरो हैं। अजहर ने सलमान के साथ बातचीत की और उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। इससे पहले अजहर ‘आज की रात है जिंदगी’ में शामिल हुए थे, जिसकी मेजबानी मेगास्टार अमिताभ बच्चन कर रहे थे। विभिन्न संगठनों ने भी उनको सम्मानित किया है, हालांकि अजहर आज भी जमीन से जुड़े हैं और कहते हैं, ‘मुझे कोई दफ्तर या कर्मचारी की जरूरत नहीं है। मेरे लाइफस्‍टइाल में कोई बदलाव नहीं आया है।’

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