भूल को लें सुधार

अक्सर देखा जाता है कि लोग ऑफिस या दुकान के लिए निकलते समय कभी रुमाल, तो कभी मोबाइल घर पर ही भूल जाते हैं। इसके अलावा लोगों के नाम या फिर पहचान भूलने की आदत भी तेजी से बढ़ी है। दरअसल, भूलना एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में काफी दिनों तक अहसास ही नहीं हो पाता और जब पता चलता है काफी देर हो चुकी होती है। भूलने की आदत को कैसे करें दूर, बता रही हैं आशाश्री

कुंदन सिंह एक कंपनी में मैनेजर हैं। काम का काफी दबाव उन पर रहता है। हालांकि उनकी मेहनत को कंपनी ने भी काफी सराहा और तरक्की दी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह काफी परेशान हैं। सुबह घर से निकलते समय अक्सर वह मोबाइल से लेकर जरूरी फाइलें तक घर में ही भूल जाते हैं। अपनी इस आदत के चलते कुंदन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस पर उन्होंने डॉक्टर को दिखाया, तो अम्नेसिया नामक बीमारी के बारे में पता चला। कुंदन अब मेमोरी ठीक करने के लिए योगासन और मेडिटेशन की शरण में हैं।

अक्सर सुनई देता कि फलां को भूलने की बहुत बीमारी है। कभी चीजें इधर-उधर रख दीं और याद नहीं रहा। कभी रास्तों का पता नहीं। भूलने की ये समस्याएं धीरे-धीरे बीमारी का रूप ले लेती हैं। उम्र और बीमारी बढऩे के साथ साथ लक्षण गंभीर होने लगते हैं। विभिन्न देशों में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग इस बीमारी के शिकार हैं। दरअसल, यह रोग मस्तिष्क की कोशिकाओं को विकृत और नष्ट कर देता है, जिससे शरीर और दिमाग का संपर्क टूटने लगता है और तंत्रिका कोशिकाओं का संचार अवरुद्ध हो जाता है। डॉक्टर भी कहते हैं कि भूलना तो समस्या है, लेकिन हर बात भूल जाना बीमारी हो सकती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि लोग इन दोनों के बीच फर्क नहीं समझ पाते। हालांकि आप भूलने की बीमारी की जांच खुद ही कर सकते हैं। दिनभर कई काम के बावजूद अगर आप सोने से पहले सुबह से शाम तक की हर छोटी बात को आसानी से याद रख पाने में सक्षम हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी मेमोरी बेहतर है।

क्यों होती है समस्या : मेमोरी कम होना या फिर खो जाना दो अलग बातें हैं, बुजुर्गों में यह समस्या 60 साल की उम्र के बाद होती है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। युवाओं में मेमोरी कम होने की वजहें अलग हैं, जैसे- अधिक तनाव, सिगरेट, शराब या फिर अनियमित नींद। मार्ग अगर अनियमित दिनचर्या से याद रखने की क्षमता कम होती है, तो उसे मेडिटेशन, योग या फिर बेहतर डायट से ठीक किया जा सकता है। जरा इन वजहों पर ध्यान दीजिए। इसमें सबसे ऊपर है डिप्रेशन। डिप्रेशन अम्नेसिया की वजह हो सकता है। लाइफ में अधिक हासिल करने की इच्छा जब पूरी नहीं होती, तो व्यक्ति हर वक्त कुछ बड़ा करने की योजना बनाता रहता है।

समाज से कटे या अकेले रहने वाले लोगों में यह लक्षण अकसर देखने को मिलता है। इसके अलावा विटामिन बी-12 की कमी अम्नेसिया का महत्वपूर्ण कारक है। इसकी कमी मस्तिष्क के स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है। साथ ही अगर आप शराब का अधिक इस्तेमाल करते हैं, तो यह भी बीमारी की वजह हो सकता है। शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं की क्रियाशीलता को कम करती है। नींद की गोलियां, एंटीथिस्टेमाइंस, ब्लड प्रेशर की दवाएं, गठिया में ली जाने दवा, एंटीडिप्रेसेन्ट, गुस्से को नियंत्रित करने के लिए ली जाने वाली गोलियां और दर्द निवारक दवाओं के ज्यादा सेवन से भी अम्नेसिया हो सकता है।

परेशान न हों

अगर आप भी मेमोरी की समस्या से जूझ रहे हैं, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित व्यायाम से मेमोरी बढ़ सकती है। अगर रोजाना सिर्फ आधे घंटे योग किया जाए, तो भी इससे राहत मिलेगी। इसके अलावा मेमोरी मजबूत करने के लिए के लिए नींद बहुत जरूरी है। कम नींद या खराब नींद हिप्पोकैम्पस में नए न्यूरॉन्स का विकास प्रभावित करती है और स्मृति, एकाग्रता व निर्णय लेने की क्षमता कम होती जाती है।

खाएं फल-सब्जियां : पत्तेदार हरी, गहरे नारंगी रंग की या लाल सब्जियां, छोटे गूदेदार फल (बेरी फल) तथा संतरे के रस का सेवन करने से मेमोमरी लॉस के जोखिम को कम किया जा सकता है, खासकर पुरुषों में। इसके अलावा एक सर्वे में कहा गया कि चॉकलेट मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाती है। रोज 10 ग्राम चॉकलेट दिमाग को चॉकलेटी बना देती है। मछली में ओमेगा-3, विटामिन-डी और अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो आपके मस्तिष्क को किसी प्रकार के मनोविकार यानी मेंटल डिसऑर्डर से सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा चुकंदर याद रखने की क्षमता बढ़ाता है। इसमें नाइट्रेट होता है, जो रक्त नलिकाओं को खोलता है और दिमाग तक खून का संचार बढ़ाता है। साथ ही कॉफी में पाई जाने वाली कैफीन से कार्यक्षमता बढ़ती है। यह अल्जाइमर से लडऩे में भी मददगार है।

मेमोरी बढ़ाने के टिप्स
– सोने से पहले एक बार दिनभर में किए कामों को दोहराने से मेमोरी कभी कमजोर नहीं होती। आप सारी दिनचर्या को याद नहीं कर पा रहे हैं, तो यह मेमोरी कम होने की शुरुआत है।
– कामों की लिस्ट बनाएं और उसे किसी चीज के साथ समायोजित करें। इससे उस चीज को याद करने से उससे संबंधित काम भी याद आ जाएगा।
– माहौल गमगीन न होने दें और पीडि़त को अकेला न छोड़ें।
– रोगी के परिचित उसके संपर्क में रहें।

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