मकर संक्रांति: शुभ दिनों की शुरुआत

मकर संक्रांति का हिंदुओं के लिए विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति मोक्ष की सीढ़ी होती है और इसी तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाते हैं, जिससे खरमास समाप्त हो जाता है। इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है और शादी-ब्याह समेत अन्य शुभ कार्यांे की शुरुआत हो जाती है। इस बार मकर संक्रांति (15 जनवरी, 2020) वैसे भी कुछ खास है। कारण यह कि इस बार शोभन योग में सूर्य का राशि परिवर्तन हो रहा है। इसीलिए मकर संक्रांति पर किया गया दान-पुण्य और अनुष्ठान बहुत अच्छा फल देने वाला होगा।

15 जनवरी को सुबह 7:52 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसीलिए 15 जनवरी को सुबह 7:52 बजे से पूरे दिन पुण्यकाल रहेगा। मकर संक्रांति को खिचड़ी बनाने और खाने का खास महत्व होता है। यही वजह है कि इस पर्व को कई जगहों पर खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस मौके पर चावल, काली दाल, नमक, हल्दी, मटर और सब्जियां खासतौर पर फूलगोभी डालकर खिचड़ी बनाई जाती है। दरअसल, चावल को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और काली दाल को शनि का, जबकि हरी सब्जियां बुध से संबंध रखती हैं। कहते हैं कि खिचड़ी की गर्मी व्यक्ति को मंगल और सूर्य से जोड़ती है।

इस दिन खिचड़ी खाने से राशि में ग्रहों की स्थिती मजबूत होती है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा को शुरू करने वाले बाबा गोरखनाथ थे। मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमजोर हो रहे थे। रोज योगियों की बिगड़ती हालत को देख बाबा गोरखनाथ ने इस समस्या का हल निकालते हुए दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी थी। यह व्यंजन पौष्टिक होने के साथ स्वादिष्ट भी था। इस दिन गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी मेला आरंभ होता है। कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और इसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper