मरे हुए भिखारी की झोपड़ी से मिले लाखों के सिक्के, पुलिस को गिनने में लग गए 8 घंटे

लोकल ट्रेन से कटकर मरे भिखारी की झोंपड़ी से तलाशी के दौरान जो कुछ मिला उससे पुलिस के होश फाख्ता हो गए। भिखारी का नाम बिरभिचंद आजाद था और गोवंडी रेलवे स्टेशन पर ट्रैक पार करते वक्त लोकल ट्रेन से कटकर इसकी मौत हो गई। भिखारी की पहचान होने पर रेलवे पुलिस की टीम उसकी झोपड़ी में पहुंची तो बोरियां और थैलियों में सिक्के भरे हुए मिले। इतना ही नहीं भिखारी के घर से बैंक की पासबुक भी मिली है, जिसमें कुल 8 लाख 77 हजार रुपये जमा की रसीद मिली है। सिक्कों को गिनने में पुलिस को 8 घंटे लग गए और ये करीब ढाई लाख रुपये के थे।

भिखारी की मौत, झोपड़ी में मिला इतना पैसा कि सबके उड़ गए होश

झोपड़ी से भिखारी का आधार कार्ड, पैन कार्ड और सीनियर सिटिजन कार्ड मिला है। जिस पर राजस्थान का पता लिखा हुआ है। राजस्थान के रहने वाले बिरभचिंद मुम्बई के गोवंडी इलाके में रेल पटरी के पास ही रहते थे और रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर अपना गुजारा करते थे,  लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके पास इतने पैसे होंगे। भिखारी के पड़ोसियों ने बताया कि पहले बिरभिचंद आजाद के साथ उसका परिवार भी रहता था, लेकिन बाद में उसका पूरा परिवार चला गया और वह अकेला रहने लगा।

भिखारी की मौत, झोपड़ी में मिला इतना पैसा कि सबके उड़ गए होश

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper