महाष्टमी के दिन होती है मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा, जानें दुर्गाष्टमी का महत्व और पूजा का समय

Durga Astami 2019: नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान महा अष्टमी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा-उपासना की जाती है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण देवी दुर्गा के इस रूप को महागौरी कहा जाता है। महागौरी की आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्‍ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है। साल 2019 में दुर्गा अष्टमी कब है (Durga Astami kab Hai), क्या है दुर्गा अष्टमी का महत्व (Durga Astami Ka Mahatva) ,दुर्गा अष्टमी की पूजन विधि (Durga Astami Ki Pujan Vidhi) और दुर्गा अष्टमी पूजा का समय। हम आपको इसके बारे में बताएंगे।

अष्टमी कब है? अष्टमी तिथि और पूजा का समय (When Is Ashtami? Ashtami Date and Puja Time):

इस साल अष्टमी 6 अक्टूबर 2019 को पड़ रही है । (Ashtami on 6th October 2019)

 

पूजा मुहूर्त- सुबह 10:30 बजे से 11:18 बजे तक

अष्टमी तिथि का महत्व

दुर्गा अष्टमी (Durga Astami) पर मां के पूजन से शांति और सुख-समृद्धि मिलती है। मां के भक्तों का उसका शत्रु भी कुछ नहीं बिगाड़ पाते। इस दिन मां का विधि- विधान से पूजन करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन दुर्गा सप्तशती (Durga SaptShati) का पाठ करना काफी शुभ रहता है। इस दिन 9 वर्ष से छोटी कन्याओं का माता का रूप मानकर पूजन किया जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।

इस दिन कन्या पूजन और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराने का अत्यंत महत्व है। सौभाग्य प्राप्‍ति और सुहाग की मंगल कामना लेकर मां को चुनरी भेंट करने का भी इस दिन विशेष महत्व है। मां की आराधना हेतु सर्वप्रथम देवी महागौरी का ध्यान करें। हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें –

 

श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इस मंत्र के उच्चारण के पश्चात महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और मां का ध्यान कर उनसे सुख, सौभाग्य हेतु प्रार्थना करें।

ऐसे करें कन्‍या पूजन

सबसे पहले नौ कन्याओं को आदर से अपने घर बुलाकर शुद्ध पानी से उन सभी के पैरे धोकर उन्हें एक साथ बैठाएं। उनके तिलकर कर कलावा बांधकर उन्हें प्रेम से भोजन कराया जाता है और फिर उपहार या दक्षिणा देकर उन्हें विदा किया जाता है।

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