माघ मेला में पंचगव्य निर्मित आयुर्वेदिक औषधि की धूम

प्रयागराज: तीर्थराज प्रयाग में माघ मेला के दौरान दूर दराज से आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालुओं में गौ मूत्र और गोबर से निर्मित आयुर्वेदिक औषधि और अन्य सामानों की खरीद के लिए विशेष रूचि देखने को मिल रही है। परेड़ स्थित त्रिवेणी मार्ग में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के शिविर स्टाल लगा कर गौमूत्र और गोबर के सौजन्य से तैयार आयुर्वेदिक औषधियों की बिक्री करने वाले अभिषेक बाजपेयी ने शुक्रवार को बताया कि गौमूत्र महौषधि है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम क्लोराइड, फॉस्‍फेट, अमोनिया, कैरोटिन, स्वर्ण क्षार आदि पोषक तत्व विद्यमान रहते हैं इसलिए

इसे औषधीय गुणों की दृष्टि से महौषधि माना गया है। वाजपेयी ने बताया कि उनके स्टॉक में अपच, आर्थराइटिस, कैटरैक्ट, डायबिटीज और फेफड़ों के संक्रमण के लिए दवाएं शामिल हैं। आंखों की देखभाल के उत्पाद दृष्टि में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। गोमूत्र के अलावा गोबर का उपयोग साबुन, फेस पैक और अगरबत्ती बनाने के लिए भी किया जाता है।

आयुर्वेदिक औषधियों की बिक्री करने वाले अभिषेक बाजपेयी ने बताया कि माघमेला में पहली बार इन उत्पादों को रखा गया है। उम्मीद से अधिक सार्थक परिणाम मिले हैं। इससे पहले 2007 अर्ध कुंभ, 2013 एवं 2019 के कुंभ मेलों में इसके स्टाल लगाये गये थे जिसके सकारात्मक परिणाम मिले थे। उन्ही परिणामों से प्रेरित होकर इस बार माघ मेला में इसका प्रयोग किया गया है। साबुन और टूथ पेस्ट से लेकर रूम फ्रेशर और अगरबत्ती से लेकर आई ड्रॉप और दर्द से राहत देने वाले तेल तक के उत्पादों की खरीद के लिए लोग चुंबक की तरह खिंचे चले आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्पाद में ऑर्गेनिक फ़र्टिलाइज़र और होम क्लीनर से लेकर आई ड्रॉप और दर्द निवारक तक हैं। जो लोग गोमूत्र और गोबर के औषधीय गुणों में विश्वास करते हैं, वे हमारे स्टॉलों पर जाते हैं। उत्पाद पहले से ही पूरे देश में सभी विहिप और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस)के शिविरों में उपलब्ध हैं। उन्होने बताया कि हम अब ग्राहाकों के लिए आनलाइन की खरीदारी साइटों के साथ पंजीकरण करने की प्रक्रिया में हैं।

बाजपेयी उन्होने बताया कि आरएसएस और विहिप और अन्य हिन्दू संगठनों के स्वयंसेवक समेत बहुत से लोग ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता यह है कि इसकी कभी कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं होती है। माघी अमावस्या नौ फरवरी स्नान पर्व के बाद वह कानपुर वापस लौट जाएंगे।

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