मास्टर स्ट्रोक: हैं तैयार हम!

आलोक निगम

वर्ष 2019 में आयोजित होने वाले वन-डे वर्ल्ड कप में अब मात्र तीन महीने का समय बचा है। मई के आखिरी सप्ताह में, जब देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी, इंग्लैंड की सरजमीं पर वल्र्ड कप की रणभेरी बज जाएगी। क्रिकेट खेलने वाले तमाम देश इस खिताब को अपने नाम करना चाहते हैं, लेकिन यह ख्वाब पूरा करना इतना आसान भी नहीं है। कुछ ही ऐसी टीमें है, जिन्हें वल्र्ड कप की ट्रॉफी को चूमने का सौभाग्य मिलता है। टीम इंडिया भी इस बार अपने कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में वल्र्ड कप भारत लाने में कोई कोर-कसर नहीं छोडऩा चाहती। वैसे भी टीम इंडिया इन दिनों जोरदार प्रदर्शन करते हुए विराट कोहली की अगुवाई में टीम नई बुलंदियों को लगातार छू रही है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज जीतकर टीम इंडिया ने समूची दुनिया में अपना डंका बजा दिया है। साथ ही वल्र्ड कप के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है। हालांकि पिछले तीन दशक से वन-डे क्रिकेट में टीम इंडिया हमेशा से मजबूत टीमों में शामिल रही है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को उनके ही घर में जबरदस्त मात देकर टीम इंडिया ने दिखा दिया कि वह नंबर वन है। हालांकि 2011 में वर्ल्ड कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम करना भी भारत की ताकत का सबूत भी प्रदान करता है।

जहां तक आईसीसी रैंङ्क्षकग की बात है, तो टीम इंडिया वर्तमान में 121 रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि इंग्लैंड की टीम पहले पायदान पर है। दिलचस्प बात तो यह है कि वल्र्ड कप इंग्लैंड की ही सरजमीं पर होना है। ऐसे में इंग्लैंड से खतरा हो सकता है। लेकिन जहां तक टीम इंडिया की बात है, तो वह इस साल होने वाले वल्र्ड कप के लिए हर एंगल से बेस्ट दिखाई दे रही है। टीम के पास बैटिंग से लेकर बॉलिंग और फील्डिंग का जबरदस्त कॉम्बिनेशन है। फील्डिंग के मामले में तो पिछले कुछ वर्षों के दौरान टीम की ताकत तेजी से बढ़ी है। अपनी मजबूत फील्डिंग के दम पर टीम इंडिया ने कई हारे हुए मैचों को भारत की झोली में डाल लिया है। कहने का मतलब यह है कि विराट की अगुवाई में टीम इंडिया के पास हर वह चीज है, जो एक चैंपियन टीम में होनी चाहिए। कप्तान के तौर पर दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज टीम के पास है।

ओपनर के रूप में रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी है, जिनके मैदान में आते ही दुनिया भर के गेंदबाजों में खौफ दिखाई देने लगता है। विकेट कीपर के रूप में महेंद्र सिंह धोनी अभी भी दम-खम के साथ जुटे हैं। गेंदबाजी में भी इस वक्त टीम इंडिया का कोई जवाब नहीं है। टीम इंडिया के गेंदबाजों के सामने सामने विश्व के धुरंधर बल्लेबाजों का भी बल्ला खामोश रह जाता है। अगर हम टीम इंडिया के पिछले एक साल के वन-डे क्रिकेट के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो उसने बेहद शानदार खेल दिखाया है। टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को उनकी सरजमीं पर ही मात दी है। चाहे भुवनेश्वर और मोहम्मद शमी हों या स्पिनर कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल, सभी ने विदेशी धरती पर शानदार प्रदर्शन किया है।

हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि टीम इंडिया सौ फीसदी परफेक्ट है और उसमें कोई कमी नहीं है। न्यूजीलैंड के खिलाफ 92 रन पर ऑलआउट हो जाना टीम इंडिया की कमजोरी को भी दर्शाता है। इससे यह सवाल उठना लाजिमी ही है कि क्या टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर में वह दम-खम नहीं है, जो मुश्किल परिस्थितियों का समाना कर सके। क्या रोहित शर्मा, विराट कोहली और एमएस धोनी के अलावा टीम इंडिया के पास कोई बल्लेबाज नहीं है, जो डूबती नैया बचा सकें। अगर इस समय की टीम इंडिया पर नजर डाली जाए, तो मिडिल और लोवर ऑर्डर सबसे बड़ी चिंता का विषय है। अंबाति रायडू, केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, आजिंक्य रहाणे, केएल राहुल, ऋषभ पंत जैसे कई खिलाड़ी हैं, जो इंग्लैंड में होने वाले वल्र्ड कप के लिए अपनी दावेदारी लगातार पेश कर रहे हैं। रायडू, जाधव और कार्तिक न्यूजीलैंड दौरे की टीम में भी थे। दिनेश कार्तिक और अंबाति रायडू ने कुछ मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे वन-डे में जब टॉप ऑर्डर नहीं चला, तो किसी खिलाड़ी का बल्ला नहीं चला। टीम पूरे पचास ओवर भी नहीं खेल सकी। नतीजा 8 विकेट से हार के रूप में मिला। हालांकि क्रिकेट की नजर से देखें, तो किसी भी टीम के लिए ऐसा दिन कभी भी आ सकता है। लेकिन जिस तरह से न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया ने चौथे वन-डे में हथियार डाले, उससे साफ हो गया अगर कोहली, धवन, रोहित और धोनी नहीं चले, तो टीम इंडिया ‘तू चल मैं आया’ वाली कहावत साकार करने लगती है।

ऐसे में जबकि वल्र्ड कप में कुछ ही महीने बचे हैं, तो टीम इंडिया को हार से सबक लेकर अपनी तैयारियों को और ज्यादा मजबूत करना होगा। वैसे भी देश का नाम अगर 2019 सबसे ऊपर रखना है, तो वल्र्ड कप के रूप में देशवासियों को तोहफा देना विराट कोहली और उनकी टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। यह चीजें तभी सफल हो सकती हैं, जब इस टीम का हर एक खिलाड़ी मुश्किल परिस्थियों में मैच जिताने की काबीलियत रखता हो। तभी टीम इंडिया वल्र्ड कप पर भारत का नाम लिखकर इंग्लैंड की सरजमीं पर तिरंगा लहरा सकेगी।

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