‘मी टू’ अभियान के शिकार अबतक चार पत्रकार ,पांचवे एमजे अकबर पर रार

दिल्ली ब्यूरो: कौन जानता था कि कार्य स्थल पर यौन शोषण की शिकार महिलाये इतना उग्र हो जाएंगी। पुरुष सत्तात्मक समाज तो कभी कल्पना भी नहीं कर पाता था कि ‘उन्ही की बिल्ली उन्ही से म्याऊं ‘ करने को आतुर हो जायेगी। पुरुषों ने जैसा चाहा अपने हिसाब से कानून बनाया और सामने वाले का दोहन किया। सेक्स को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले और महिलाओं के अधिकार को लेकर बड़े बड़े कॉलम लिखने वाले लोगों की निर्लज्जत अब सबके सामने है। महिलाओं का मी टू अभियान ने उन चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो अपने पद का दुरुपयोग महिलाओं का शोषण करने के लिए कर रहे थे। महिलाओं का अभियान कहाँ तक जाएगा और कितने पत्रकार नंगे होंगे कहना मुश्किल है। इस अभियान ने अभी तक चार पत्रकारों की बलि ले ली है। बलि चढ़े ये पत्रकार कोई मामूली नहीं। सब अपने अपने मिजाज के शीर्ष पत्रकारों में शुमार रहे हैं। उनकी लेखनी बहुत कुछ कह रही थी और देश उसे पढ़कर अपना मिजाज बदल रहा था। अब वे सब मुँह छुपाये गहरे अवसाद में चले गए हैं।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के पत्रकार रहे मयंक जैन पर भी कुछ महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए, जिसके बाद उन्होंने अख़बार से इस्तीफा दे दिया। टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक केआर श्रीनिवास पर भी छह से सात महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिसके बाद प्रबंधन ने उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है। टाइम्स आॅफ इंडिया कार्यकारी संपादक और डीएनए के संस्थापक संपादक रह चुके गौतम अधिकारी पर भी कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। वर्तमान में अधिकारी सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस में सीनियर फेलो थे। आरोपों के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
इसके अलावा यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक और ब्यूरो चीफ प्रशांत झा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है।

अब हालिया आरोप कई वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने ‘मीटू’ अभियान के तहत यौन उत्पीड़न का आरोप पूर्व महान पत्रकार और विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर लगाया है। उनसे इस्तीफे की मांग विपक्ष कर रहा है और माना जा रहा है कि विदेश से लौटकर वे इस पर निर्णय लेंगे या फिर सरकार उनसे इस्तीफे की मांग करेगी। इन आरोपों के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने यौन उत्पीड़न की शिकार महिला पत्रकारों का समर्थन करते हुए मीडिया संस्थानों से ऐसे सभी मामलों में बिना भेदभाव के जांच करने को कहा है।

गिल्ड ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा है कि यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गए किसी भी शख़्स को क़ानून के हिसाब से दंडित किया जाना चाहिए। देश में प्रेस की आज़ादी के लिए निष्पक्ष, न्यायोचित और सुरक्षित कार्य वातावरण ज़रूरी है। यौन उत्पीड़न की घटनाओं का स्पष्ट विरोध करते हुए गिल्ड ने सार्वजनिक बहस में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने का साहस दिखाने वाली महिला पत्रकारों की प्रशंसा की और उनके साथ एकजुटता प्रकट की.उसने महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के वाकयों पर चिंता भी प्रकट की। गिल्ड ने कहा, ‘जब यौन उत्पीड़न करने वाला पेशे के लिहाज़ से वरिष्ठ पद पर हो तो स्थिति और बदतर हो जाती है।’

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