मैजिक म्यूजिक का

म्यूजिक में बड़ी ताकत होती है। यही वजह है कि लोरी सुन कर बच्चे सो जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को सॉफ्ट म्यूजिक सुनने की हिदायत दी जाती है, ताकि कोख में भी बच्चे को आराम मिल सके। रिसर्च बताते हैं कि अगर आप म्यूजिक सुनते हैं, तो खुशमिजाज रहते हैं और सोचने-समझने की शक्ति भी बढ़ती है। इतना ही नहीं अगर आप किसी बीमारी से पीडि़त है, तो वह समस्या भी धीरे-धीरे सुधरने लगती है।

म्यूजिक का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। म्यूजिक सुनने से लोगों को क्या फायदे होते हैं, इस पर कई रिसर्च भी हो चुकी हैं। इसी क्रम में ज्यूरिख की यूनिवॢसटी में तय समय से तीन महीने पहले पैदा हुई एक बच्ची मथिल्डा पर रिसर्च चल रही है। रिसर्चर जानना चाहते हैं कि क्या संगीत उसके विकास में मदद कर सकता है? हफ्ते में तीन बार फ्रीडरिके हास्लेबेक मथिल्डा के कान में गुनगुनाती हैं। वह जानना चाहती हैं कि क्या समय से पहले जन्मे बच्चों के दिमाग के विकास पर संगीत का असर पॉजिटिव होता है। फ्रीडरिके हास्लेबेक रिसर्च के बारे में बताती हैं कि उनकी थ्योरी बहुत से अध्ययनों पर आधारित है, जो दिखाते हैं कि म्यूजिक कैसे हमारे मस्तिष्क के कई हिस्सों को एक साथ उत्तेजित करता है।

इसे म्यूजिकल लॄनग कहा जाता है, जो जन्म से पहले ही शुरू हो जाती है। इसलिए प्रीमेच्योर बच्चों पर इसका असर होना चाहिए। जब फ्रीडरिके गुनगुनाती हैं, तो दिखता है कि इससे बच्ची को सुकून मिलता है, वह हाथ उठाती है और आंखें खोलती है। रिसर्चर अपनी थ्योरी को 60 बच्चों पर परख रहे हैं। 30 बच्चों के साथ म्यूजिक थेरेपी और 30 बच्चों के साथ बिना म्यूजिक वाली थेरेपी की जा रही है। शुरुआती नतीजे दिखाते हैं कि शिशुओं के मस्तिष्क विकास पर म्यूजिक का असर होता है। बीते 25 साल से म्यूजिक थेरेपी पर काम कर रहे न्यूरोसाइंटिस्ट लुत्स यैंके बताते हैं कि उम्मीद है हमें कुछ ऐसी जानकारियां मिलेंगी जो आगे चल कर बीमारियों के इलाज में काम आएंगी।

दरअसल, संगीत का असर हमारे तन और मन दोनों पर पड़ता है। इसलिए जब भी समय मिले संगीत जरूर सुनें। इससे आप बुढ़ापे में भी खुद को फ्रेश महसूस करेंगे। उम्र के साथ आपका दिमाग भी तेज होगा, क्योंकि संगीत से दिमाग की कसरत होती है। इसी वजह से आजकल अस्पतालों में भी संगीत का सहारा लिया जा रहा है, क्योंकि देखा गया है जिन मरीजों को संगीत सुनाया जाता है उनके स्वस्थ होने में समय भी कम लगता है। म्यूजिक-न्यूरोसाइंस पर रिसर्च कर रहे साइकोलॉजिस्ट डेनियल जे. लेविटिन यह बताते हैं कि मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के मामले में म्यूजिक थेरेपी के नतीजे बेहद ही रोचक और सुखद हैं। इस रिसर्च से यह भी सामने आया की इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर पॉजिटिव असर पड़ता है। तनाव वाले हार्मोंस कम होते हैं। इतना ही नहीं, मां की लोरी को भी महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि लोरी सुनने की आदत से बच्चा शांत और सजग रहता है। बच्चे को नींद भी अच्छी आती है और वह बार-बार रोता भी नहीं है। म्यूजिक थेरेपी से गर्भावस्था के समय महिलाओं में भी तनाव को कम पाया गया। इसके अलावा कई रोगों में जहां दवा काम नहीं करती, वहां संगीत अपना जादुई असर दिखाता है, क्योंकि संगीत इंसान में जीने की भावना को जन्म देता है। कई रिसर्च में म्यूजिक सुनने के ढेरों फायदे पता चले हैं।

तनाव और चिंता दूर करे : संगीत सुनने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कॉर्टीसोल लेवल को कम करके यह तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे आप अधिक पॉजिटिव महसूस करते हैं। हाल ही में टोक्यो में हुई एक रिसर्च के मुताबिक अगर इंसान संगीत का सहारा ले तो चिंता, डिप्रेशन, टेंशन के लेवल को कम कर सकता है। क्लासिकल म्यूजिक इसमें ज्यादा फायदेमंद होता है।

दर्द कम करे : दर्द चाहे तन का हो या मन का, संगीत दोनों में ही राहत पहुंचाता है। एक रिसर्च में पाया गया है कि असहनीय दर्द में जब रोगी को संगीत सुनाया गया, तो वह अपने दर्द की प्रतिक्रिया देना भूल ही गया। अलबर्टा यूनिवॢसटी में 3 से 11 साल की उम्र के 42 बच्चों पर रिसर्च किया गया। जिन बच्चों को अच्छा संगीत सुनाया गया, उन्हें इंजेक्शन लगाने के दौरान कम दर्द हुआ।

इम्यून सिस्टम मजबूत बनाए : एक रिसर्च के मुताबिक, संगीत से आपके शरीर में इम्मुनोग्लोबुलिन ए में वृद्धि होती हैं। यह एंटीबॉडी श्लेष्म प्रणाली में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है और कोशिकाओं को स्वस्थ रखती है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत बनता है।

बैकपेन घटाए : जब कोई धीमा संगीत सुना जाता है, तो हाई ब्लडप्रेशर और दिल की धड़कन भी धीमी हो जाती है। इससे हम आराम से और बेहतर सांस ले पाते हैं। बेहतर और पर्याप्त सांस लेने से पेट, कंधे, गले और बैक में मांसपेशियों का खिंचाव कम हो जाता है जिससे गंभीर बैकपेन यानी पीठ दर्द से बच जाते हैं। ऑस्ट्रिया में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों को बैक सर्जरी के बाद म्यूजिक थेरेपी दी गई, उन्हें सर्जरी के बाद बैकपेन में बहुत राहत मिली। यह रिसर्च 21 से 28 साल के व्यक्तियों पर की गई थी।

वर्कआउट बेहतर करे : ब्रूनल यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के अनुसार संगीत और ह्रदय का एक्सरसाइज के दौरान एक गहरा संबंध रहता है। इसलिए एक्सरसाइज के वक्त संगीत सुनना ना भूलें। इसीलिए जिम में स्लो म्यूजिक को प्ले किया जाता है।
मेमोरी तेज करे : कुछ भी पढ़ते वक्त अगर आप अपनी पसंद का स्लो म्यूजिक सुनते हैं, तो पढ़ा हुआ बेहतर याद रहता है। पसंदीदा म्यूजिक सुनने से स्ट्रोक का खतरा कम होता है। कमजोर याददास्त वाले लोग शब्द भले ही भूल जाएं, लेकिन संगीत नहीं भूलते। ऐसा इसलिए होता है दिमाग का जो पार्ट संगीत प्रोसेस करता है ठीक उसके पास वाला पार्ट ही याददास्त से जुड़ा होता है। इसलिए मेमोरी का संगीत से अटूट संबंध है।

म्यूजिक कैसे है फायदेमंद

पुरुष : रिसर्च के अनुसार जो पुरुष रोजाना संगीत सुनते है वे दूसरों के मुकाबले अधिक पॉजिटिव होते हैं। इससे उनकी निजी और कामकाजी जिंदगी सुखद होती है।
महिलाएं : अमेरिकन स्टडी यह दावा करती है कि जो महिला गर्भावस्था के समय संगीत सुनती हैं, उन्हें दर्द का सामना कम करना पड़ता है और डिलिवरी की भी कम चिंता करती हैं।
बच्चे : हांगकंाग की रिसर्च के अनुसार जो बच्चे संगीत की शिक्षा लेते हैं, वह पढ़ाई में भी अव्वल रहते हैं। एक दूसरी रिसर्च यह भी कहती है ऐसे बच्चे अधिक मिलनसार, मददगार और एकाग्र होते हैं।
वृद्ध : रिसर्च के अनुसार जो व्यक्ति शुरू से ही संगीत का रियाज करते हैं, वह बुढ़ापे में भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। म्यूजिक से दिमाग जवान रहता है। इस कारण वे बुजुर्ग होने के बाद भी दिमाग से बेहतर सोच व समझ पाते हैं।

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