मोदी कैबिनेट ने दी नए तीन तलाक बिल को मंजूरी, पढ़ें सरकार के अन्य बड़े फैसले

नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी दी। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हम आने वाले ससंद सत्र में तीन तलाक बिल को पेश करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई की इस बार राज्यसभा में भी इस बिल को पास कर दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 माह बढाई गई

वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर में और 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन को बढ़ा दिया है। यह तीन जुलाई 2019 से प्रभावी हो जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कैबिनेट ने जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक, 2019 को मंजूरी दी, जो कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए राहत है। अब वे विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में सीधी भर्ती, पदोन्नति और प्रवेश में आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं।

दरअसल, मोदी सरकार ने लोकसभा में इस विधेयक को पास करवा लिया था। लेकिन सरकार विपक्ष के विरोध के कारण यह विधेयक राज्यसभा में नहीं रख पाई। अब राज्यसभा का सत्र भी समाप्त हो गया है जिससे तीन तलाक को अपराध बनाने वाला अध्यादेश भी स्वत: निरस्त हो गया। अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद सबसे पहले 17 जून से शुरू हो रहे 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में पेश किया जाएगा। पिछली बार राज्य सभा में सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष इस विधेयक को रोकने में सफल हो गई थी। ऐसे में इस बार इस विधेयक पर राज्य सभा के रुख पर सभी की निगाहें होंगी।

बता दें कि मोदी सरकार के नए कार्यकाल में आज पहली कैबिनेट बैठक हुई। बताया जा रहा है कि बैठक में सरकार ने के अगले पांच साल के लिए कार्य योजना पर भी चर्चा की है। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में मंत्रिपरिषद की बैठक नियमित रूप से होती थी।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े तीन महत्त्वपूर्ण विधेयक लाने की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय चिकित्सा परिषद् (संशोधन) विधेयक समेत स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े तीन महत्त्वपूर्ण विधेयक लाने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में संसद में इन विधेयकों को लाने की मंजूरी दी गयी। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि भारतीय चिकित्सा परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2019, होम्योपैथी केंद्रीय परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2019 और डेंटिस्ट (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंजूरी दी गयी है। इसके साथ ही केंद्रीय होम्योपैथी परिषद् का कार्यकाल भी 16 मई 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

भारतीय चिकित्सा परिषद् को समाप्त कर नये परिषद् के गठन के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है। इससे जुड़े अध्यादेश के जरिये पहले ही परिषद् को समाप्त किया जा चुका है। विधेयक में 25 सितंबर 20़20 तक उसे समाप्त रखने और इस दौरान संचालन मंडल द्वारा परिषद् का कामकाज चलाने का प्रावधान होगा। ऐसी ही व्यवस्था केंद्रीय होम्योपैथी परिषद् के लिए 16 मई 2020 तक करने का प्रावधान होम्योपैथी परिषद से जुड़े विधेयक में है। इसके लिए भी अभी अध्यादेश अस्तित्व में है। डेंटिस्ट परिषद् से जुड़े विधेयक के जरिये उसके लिए भी चिकित्सा परिषद् और होम्योपैथी परिषद् जैसी व्यवस्था की जायेगी।

आधार संशोधन विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी

मंत्रिमंडल ने आधार एवं अन्य विधियां (संशोधन) अध्यादेश, 2019 का स्थान लेने वाले संशोधन विधेयक को बुधवार को मंजूरी दे दी, जिसे संसद के आगामी सत्र में पेश किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बैठक में लिये गये फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि आधार एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2019 संबंधित अध्यादेश का स्थान लेगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गत दो मार्च को संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दी थी।

लोकसभा ने गत चार जनवरी को इससे संबंधित विधेयक पारित कर दिया था, लेकिन विधेयक राज्य सभा में पेश नहीं किया जा सका था। इसलिए सरकार को गत 28 फरवरी को अध्यादेश लाना पड़ा था, जिसे राष्ट्रपति ने दो मार्च को मंजूरी दी थी। संशोधन विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश किया जायेगा। संशोधन विधेयक में आधार के दुरूपयोग को रोकने तथा लोगों की निजता को बनाये रखने के लिए कड़े प्रावधान किये गये हैं। अब किसी व्यक्ति की पहचान के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जायेगा। उच्चतम न्यायालय ने गत वर्ष 26 सितम्बर को अपने फैसले में आधार कानून के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया था ताकि लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जा सके और उनकी निजता को बरकरार रखा जा सके। यह विधेयक इसी के मद्देनजर लाया गया है।

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