यमन में एक साल तक बंधक रहे 9 भारतीय मछुआरे, मालिक की नाव चुराकर पहुंचे भारत

नई दिल्ली: यमन में एक सुल्‍तान की कैद से भागे नौ भारतीय मछुआरे जब कोच्ची तट पर पहुंचे तो आंखों के आंसू उनकी खुशी ब्यां कर रहे थे। 10 दिन तक 3000 किलोमीटर लंबा समुद्री सफर तय करने के बाद सभी मछुआरों ने भारतीय सरजमीं पर पैर रखे तो घुटनों के बल बैठ गए और धरती को चूमा। उनकी खुशी का ठिका नहीं था। जानकारी के अनुसार 9 भारतीय मछुआरों को यमन में एक सुल्तान ने बीते एक साल से बंधक बनाकर रखा था। उनमें से 2 केरल व 7 मछुआरे तमिलनाडु के थे। इन मछुआरों से जरूरत से ज्यादा काम कराया जाता था और मारा-पीटा जाता था।

मछुआरों ने किसी तरह अपने मालिक की नाव चुरा ली और 10 दिनों तक 3000 किलोमीटर लंबा समुद्री सफर तय करने के बाद भारत पहुंच गए। कोच्चि तट से 75 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद भारतीय कोस्ट कार्ड के जवानों ने जब मछुवारों की नाव को रोका तो उन्होंने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इस नाव के बारे में कोस्ट गार्ड के डॉर्नियर एयरक्राफ्ट को जानकारी मिली थी। बताया जाता है कि 13 दिसंबर 2018 को इन मछुआरों ने मछलियां पकड़ने के लिए तिरुवनंतपुरम का तट छोड़ा था।

वह मछली पकड़ने के चक्कर में काफी आगे निकल आए और उन्हें यमन में कैद कर लिया गया। वह उन्हें नाव में रखता था और काफी काम कराता था। इन मछुआरों को दिनभर में केवल एक बार खाने को दिया जाता था। मछुआरों ने बताया कि उन्होंने जिस नाव को चुराया था उसमें प्याज और ईंधन और खाने पीने का कुछ सामान पहले से मौजूद था, जिसके कारण वह 3000 किलोमीटर का सफर तय कर सके।

मछुआरों के परिजनों को दी गई जानकारी पुलिस ने बताया कि इन मछुआरों को इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही परिजनों को सौंपा जाएगा। कोस्टल पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी मछुआरों के परिजनों को इसकी जानकारी दे दी गई है। सभी मछुआरों के परिजन शनिवार दोपहर तक कोच्चि पहुंच जाएंगे। अगर सबकुछ ठीक रहा तो उन्हें जल्द से जल्द रिहा कर दिया जाएगा।

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