यूं ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर नहीं अड़े राहुल गांधी

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। हार के बाद पार्टी में इस्तीफों का सिलसिला जारी है। इस बीच, पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पद छोड़ने की पेशकश की है। राहुल ने 25 मई को हुई कार्यसमिति की पहली बैठक में अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी, जिसे उनकी मां और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने खारिज कर दिया था। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी राहुल से पद पर बने रहने की भावुक अपील की थी।

सूत्रों के अनुसार, सोनिया अपने बेटे राहुल के अध्यक्ष पद छोड़ने के फैसले के खिलाफ हैं, खासकर यह देखते हुए कि पार्टी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है और ऐसे में राहुल के लिए फिर से अध्यक्ष पद पर वापसी करना आसान नहीं होगा, मगर राहुल के करीबी नेताओं का कहना है कि इस्तीफे का मतलब यह नहीं है कि राहुल अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं बल्कि उनकी योजना पदयात्रा करने और देशभर में पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्‍थापित करने की है।

राहुल इस्तीफा देते हैं तो पार्टी के सामने यह सवाल भी होगा कि उनकी जगह कौन यह पद संभालेगा। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से नेहरू-गांधी परिवार को दूर रखने के लिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एकजुट हो गए थे। सूत्र यह भी बताते हैं कि गत शनिवार को हुई कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी के कई सीनियर नेता एकजुट हो गए हैं। बता दें कि बैठक में राहुल ने इन सीनियर नेताओं पर पुत्रमोह में पार्टी की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।

वहीं, राहुल के करीबियों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़कर पार्टी नेताओं को सबक सिखाना चाहते हैं। इसके अनुसार, अगर राहुल के इस्तीफे के बाद पार्टी में बिखराव होता है तो हो सकता है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नेतृत्वकर्ता के तौर पर गांधी परिवार की अहमियत महसूस करें। ठीक उसी तरह, जिस तरह 1998 में सीताराम केसरी को बाहर कर सोनिया गांधी सत्ता में आई थीं। बेशक अब समय अलग है. एक ओर कांग्रेस पर सबसे बड़ा संकट है तो दूसरी ओर उसकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी अधिक चतुर है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या अतीत में छोड़ा गया तीर वर्तमान में भी पार्टी के लिए सटीक निशाने पर लगेगा।

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