यूपी में कांग्रेस के दांव से घायल होती मायावती

दिल्ली ब्यूरो: यूपी में कांग्रेस की पैतरेबाजी बसपा प्रमुख मायावती को घायल कर रही है। मायावती कांग्रेस की रणनीति को जान समझकर भी मौन है। मौन नहीं रहेगी तो वोटों का नुक्सान और ज्यादा हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस और बसपा एक दूसरे के साथ शह और मात का खेल कर रहे हैं। दोनों ओर से खूब दांवपेंच हो रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में असली लड़ाई भाजपा बनाम महागठबंधन का नहीं है, बल्कि बसपा और कांग्रेस का है।

बसपा के खिलाफ कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव यह है कि वह लगातार यह मैसेज दे रही है कि बसपा के साथ कांग्रेस की किसी तरह की अंडरस्टैंडिंग है और चुनाव के बाद बसपा का समर्थन कांग्रेस को मिलेगा। पहले कांग्रेस के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद बसपा के साथ कांग्रेस का तालमेल हो सकता है। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में कहा कि चुनाव के बाद मायावती कांग्रेस से तालमेल करेंगी। कांग्रेस जमीनी स्तर पर भी इसका प्रचार कर रही है कि कांग्रेस और बसपा एक साथ हैं। कांग्रेस इस दांव से बसपा के कोर मतदाताओं को मैसेज दे रही है कि वे कांग्रेस को वोट दे सकते हैं। साथ ही मुस्लिम मतदाताओं का कंफ्यूजन भी दूर किया जा रहा है।

मायावती इस बात को समझ रही हैं तभी वे भाजपा के साथ साथ कांग्रेस पर भी बराबर हमला कर रही हैं। पर उनकी मुश्किल है कि वे खुल कर नहीं कह सकती हैं कि चुनाव के बाद वे कांग्रेस के साथ नहीं जाएंगी। ऐसा कहेंगी तो यह मैसेज होगा कि वे भाजपा के साथ जा सकती हैं, जिससे मुस्लिम और दलित दोनों वोट बिगड़ेंगे। तभी वे कांग्रेस से दूरी तो दिखा रही हैं पर चुनाव बाद की तस्वीर पर कुछ नहीं बोल रही हैं। इसका फायदा कांग्रेस उठा रही है।

तभी माना जा रहा है कि इस चुनाव में सबसे मुश्किल चक्रव्यूह में मायावती फंसी हैं। उनको कांग्रेस और भाजपा दोनों से अपने वोट का नुकसान दिख रहा है। उनको यह भी लग रहा है कि कांग्रेस मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण का पुराना वोट बैंक फिर से हासिल करने की राजनीति कर रही है। इससे बसपा बिल्कुल हाशिए में जाएगी।

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