योगी सरकार ने शुरू किया रामलीला का ऑनलाइन प्रशिक्षण

लखनऊ: कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते इस वर्ष रामलीला जैसे आयोजनों का प्रवाह बाधित होने की आशंका जताई जा रही है. इसके लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार रामलीला की जीवंतता बनाए रखने के लिए कुछ नए प्रयोग भी लगातार कर रही है. इसी क्रम में देश में पहली बार रामलीला के ऑनलाइल प्रशिक्षण की शुरुआत की गई है. यूपी संस्कृति विभाग की स्वायत्तशासी संस्था अयोध्या शोध संस्थान ने राम‍लीला विधा की प्रासंगिकता बनाये रखने की नई राह खोज ली और यह चिर-परिचित मंचीय परंपरा से कहीं अधिक संभावनाशील मानी जा रही है.

इस क्रम में शोध संस्थान ने छह महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है. अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाइ. पी. सिंह को उम्मीद है कि इस कोर्स से भारतीयों के अलावा विदेशों में बसे लोगों को भारतीय शैली की रामलीला के मंचन के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और वे रामलीला के प्रति उत्सुक होंगे. छह माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत रामलीला के उत्तर भारतीय विशेषज्ञ ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे. इस कोर्स को नाम ‘ऑनलाइन रामलीला मास्टर आर्टिस्ट ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स’ है.

योजना के अगले चरण में अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अमेरिका, कैरेबियाई देशों और मॉरीशस जैसे देशों पर ध्यान केंद्रित किया जाना है. इन देशों में रामलीला का प्रचलन पूर्व से ही है और ऑनलाइन कोर्स से इस जुड़ाव को और पुख्ता होने की संभावना है. शोध संस्थान के निदेशक वाइ. पी. सिंह के अनुसार, संस्कृति विभाग की ओर से होने वाले समारोहों में इस ऑनलाइन कोर्स के सर्टिफिकेट होल्डर को प्राथमिकता दी जाएगी और इस सबके पीछे मंशा रामलीला को कहीं अधिक संगठित और सार्थक-सारगर्भित बनाया जाना है. वे बताते हैं कि छह माह के इस कोर्स में सप्ताह के दो दिन ऑनलाइन वेबिनार कान्फ्रेंस किया जाएगा, जिसमें छात्रों को रामलीला के विविध आयामों की जानकारी वीडियो और फिल्म के जरिए दी जाएगी. इस दौरान उनमें अभिनय, संवाद लेखन, संवाद अदायगी, मंच सज्जा आदि की प्रतिभा तराशने और सामने लाए जाने की कोशिश होगी.

गोरखपुर के रंगमंच के कलाकार मानवेंद्र त्रिपाठी इस कोर्स के मुख्य प्रशिक्षक हैं. मानवेंद्र ने पिछले हफ्ते से प्रशिक्षण शुरू कर दिया है. ‘ऑनलाइन रामलीला मास्टर आर्टिस्ट ट्रेनिंग सर्टिफिकेट कोर्स’ में अब तक इज्राएल, गुयाना, मॉरिशस .त्रिनिदाद, श्रीलंका और वेनेजुएला के 300 विदेि‍शयों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. विदेशी नागरिकों को रामलीला का प्रशिक्षण आसान नहीं है. मानवेंद्र बताते हैं कि कई बार भाषा की मुश्किलें आती हैं. इसलिए साथ में अनुवादक भी रखा गया है. ऑनलाइन रामलीला प्रशिक्षण के दौरान पहले हिंदी में उसके बाद पूरे भावों के साथ अंग्रेजी में बोल कर रामलीला के प्रसंग समझाया जा रहा है.

मानवेंद्र बताते हैं कि कार्यशाला से जुड़े विदेशी नागरिकों में अच्छी खासी तादाद भारतीय मूल के नागरिकों की है. ये ऐसे कलाकार हैं जिनके पूर्वज काफी समय पहले विदेश में बस गए थे. मानवेंद्र बताते हैं कि शाम साढ़े सात बजे से रात साढ़े दस बजे तक ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाता है. तीन घंटे का प्रशिक्षण देने के लिए रंगकर्मियों को छह घंटे से उसकी तैयारी करनी होती है. मानवेंद्र बताते हैं, “रामलीला के जिस दृश्य का ऑनलाइन प्रशिक्षण देना होता है, पहले हमारे रंगमंच की पूरी टीम फुल ड्रेस और मेकअप में उसका मंचन करती है. मंचन की रिकार्डिंग ऑनलाइन शेयर की जाती है. सभी प्रतिभागी उसे देख लेते हैं, उसके बाद इसके बारे में जानकारी दी जाती है.”

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लीड इंस्ट्रक्टर मानवेंद्र सिंह के अलावा वाइ. शंकर मूर्ति मेंटर की भूमिका में हैं. राम दरश शर्मा गायक हैं. मेकअप मैन राधेश्याम हैं. इसके अलावा कलाकारों में संजय सिंह, अरुण सिंह, शि‍वकुमार मिश्र, नवनीत कुमार, मनीष श्रीवास्तव, देवेंद कुशवाहा, धानी गुप्ता, रिनी सिंह, अंकिता, अकांक्षा और पूर्णिमा अलग-अलग किरदारों की भूमिका का प्रशि‍क्षण दे रहे हैं. ट्रांस्लेशन और सेशन कोआर्डिनेशन का काम इंद्रिया घोषाल और योगी राज संभाल रहे हैं.

आजतक से साभार

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper