रक्षाबंधन विशेष: जानिए कब तक रहेगी भद्रा, क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

लखनऊ। रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का उत्सव है। इस दिन बहनें भाइयों की समृद्धि के लिए उनकी कलाई पर रंग-बिरंगी राखियाँ बांधती हैं, वहीं भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को राखरी भी कहते हैं। यह सबसे बड़े हिन्दू त्योहारों में से एक है। रक्षाबंधन का त्यौहार प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाते हैं, इसलिए इसे राखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्यौहार अब की बार 15 अगस्त 2019 ,गुरुवार को मनाया जाएगा।

कब तक रहेगी भद्रा

रक्षाबंधन के पर्व को भद्रा की नजर लगने पर राखी बांधने के समय में फेरबदल करना पड़ता है। भद्रा रहित काल में ही राखी बांधने का विधान शास्त्रसम्मत माना जाता है। सौभाग्य से इस बार इस पावन पर्व को भद्गा की नजर नहीं लग रही है। इसलिये बहनें भाइयों की कलाई पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच रक्षाबंधन का अनुष्ठान कर सकती हैं। अनुष्ठान का समय प्रात: 05:53 से सांय 17:58 बजे तक रहेगा। अपराह्न मुहूर्त 13:43 बजे से 16:20 बजे तक है।

क्या है भद्रा

मान्यता के अनुसार जब भी भद्रा का समय होता है तो उस दौरान राखी नहीं बांधी जा सकती। शास्त्रों की मान्यता के अनुसार भद्रा का संबंध सूर्य और शनि से होता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी क्रूर बताया गया है। इस उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उसे कालगणना या पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। जहां उसका नाम विष्टी करण रखा गया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया। इसलिये इस बार भद्रा का साया समाप्त होने पर ही रक्षाबंधन अनुष्ठान किया जाता है। लेकिन इस बार भद्रा मुक्त रक्षाबंधन होने से यह बहनों के लिये बहुत ही हर्ष का पर्व है।

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार गुरुवार के दिन पड़ेगा। जो कि देव गुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। रक्षाबंधन को लेकर मान्यता है कि बृहस्पति देवराज इंद्र की विजय प्राप्ति के लिये इंद्र की पत्नी को रक्षासूत्र बांधने को कहा था। वहीं इसका चलन माना जाता है। इस कारण गुरुवार के दिन यह पर्व होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

ग्रहण मुक्त है इस बार की राखी

रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा और ग्रहण से मुक्त ही मनाया जाता है। राखी का त्यौहार भद्रा व ग्रहण से पीड़ित हो तो यह संयोग सौभाग्यशाली नहीं माना जाता लेकिन इस बार राखी ग्रहण से मुक्त है क्योंकि इस वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 16-17 जुलाई को लग गया है। श्रावण पूर्णिमा इस बार ग्रहण से मुक्त रहेगी जिससे यह और भी सौभाग्यशाली हो जाती है।

शुभ महूर्त

रक्षा बंधन तिथि – 15 अगस्त 2019, गुरुवार

रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय- 05:53 से 17:58

अपराह्न मुहूर्त- 13:43 से 16:20

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 15:45 (14 अगस्त)

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 17:58 (15 अगस्त)

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