राजस्थान में बीजेपी के बड़े दावे लेकिन हांफ रही है वसुंधरा राजे 

दिल्ली ब्यूरो : 7 दिसंबर को राजस्थान में चुनाव होने हैं। बीजेपी किसी भी सूरत में यह चुनाव हारना नहीं चाहती। राजनीति भी यही कहती है कि जनता को चाहे जितना बेवकूफ बनाया जाय लेकिन चुनाव में जीत होनी चाहिए। इसी राजनीति के तहत बीजेपी फिर से सत्ता में लौटना चाहती है जबकि कांग्रेस किसी भी सूरत में बीजेपी को पटखनी देना चाह  रही है। वैसे राजस्थान में अकसर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन होते रहे हैं लेकिन जबसे केंद्र में मोदी की सरकार बनी है तब से बीजेपी अब किसी भी राज्य में लम्बे समय तक सत्ता का सुख भोगने में यकीं करने लगी है। ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। क्योंकि राजनीति का यह  जनता खेलती है और अंतिम निर्णय भी वही लेती है।
इधर चुनाव से पहले राजस्थान चुनाव को लेकर कई सर्वे सामने आये हैं जिसमे कहा गया कि बीजेपी की हार की संभावना है और कांग्रेस सत्ता में लौट सकती है। यह बात और है कि सर्वे कई दफा गलत भी हो जाते हैं क्योंकि मतदाता अंतिम समय में अपना निर्णय बदल देते हैं और हारने वाली पार्टी सत्ता तक पहुँच जाती है। लेकिन इतना तो साफ़ है कि इस चुनाव में बीजेपी के सामने परेशानी ज्यादा है और वसुंधरा राजे के सामने चुनौती बढ़ गई है। इस चुनाव में अगर वसुंधरा चुनाव जीत कर बीजेपी को फिर सत्ता सौपती है तो उसका कद पार्टी में और बढ़ेगा वरना यह भी सच है कि हार के बाद वसुंधरा की राजनीति तबाह भी हो सकती है क्योंकि पार्टी के भीतर वसुंधरा के दुश्मन कम नहीं। यही वजह है कि  प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी पूरी ताकत इस चुनाव में झोंक रही हैं।
कयास लगाए जा रहे थे कि सत्ता विरोधी लहर के चलते वसुंधरा राजे अपनी परंपरागत सीट की बजाए किसी दूसरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए वसुंधरा राजे ने झालरापाटन की सीट से ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया और 17 नवंबर को यहां से नामांकन दाखिल किया था। गौर करने वाली बात यह है कि इस सीट से वसुंधरा राजे 2003 से लगातार अजेय रही हैं। लेकिन इस बार उनका सामना यहां काफी कड़ा होने वाला है। काफी खींचतान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है, ऐसे में इन दोनों दिग्गज नेताओं के आमने-सामने आने से इस सीट पर यह मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। दरअसल मानवेंद्र सिंह और वसुंधरा राजे के परिवार के बीच खींचतान काफी लंबे समय से चली आ रही है, लिहाजा माना जा रहा है कि इस बार का चुनाव दिलचस्प हो सकता है।
लोगों का मानना है कि एक तरफ जहां यह चुनाव राजे के लिए स्वाभिमान की लड़ाई है तो दूसरी तरफ मानवेंद्र सिंह के लिए यह बदले का चुनाव है। राजे के सामने दोहरी चुनौती जिस तरह से वसुंधरा राजे इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं उसने उनकी मुश्किल को बढ़ा दिया है। दरअसल एक तरफ जहां राजे पर प्रदेश में पार्टी की जीत को सुनिश्चित करना है तो दूसरी तरफ उन्हें अपनी सीट को भी बचाना अहम है। ऐसे में वसुंधरा राजे को दो तरफ अपना ध्यान केंद्रित करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनका यह चुनावी अभियान काफी मुश्किल साबित हो रहा है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि आने वाले चुनाव के नतीजे किस ओर इशारा करते हैं।
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