राजीव गांधी सरकार ने जानें क्यों शिक्षा मंत्रालय को बना दिया था एचआरडी मंत्रालय

नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति पर मुहर लगाने के साथ-साथ बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया। लेकिन हम आपको बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम पहले शिक्षा मंत्रालय ही था। यानी इसका पहले वाला नाम अब वापस कर दिया गया है। अब सवाल है कि आखिर कब और क्यों ऐसी जरूरत पड़ी कि शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया था? 1985 में राजीव गांधी की सरकार के दौरान शिक्षा मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय में तब्दील कर दिया गया था। इसके अगले वर्ष नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई थी। इसके 34 साल बाद अब शिक्षा नीति में बदलाव किया जा रहा है।

आजादी के बाद से 1985 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय ही कहा जाता था। 1984 में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, तब वह देश की व्यवस्था में काफी बदलाव लाना चाहते थे। वह लगातार कई क्षेत्रों में नवोन्मेष पर जोर दे रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस वक्त वह कई सलाहकारों से घिरे रहा करते थे। तब उन्होंने सलाहकारों के इस सुझाव को माना कि शिक्षा से जुड़े तमाम विभागों को एक छत के नीचे लाया जाना चाहिए। इस तर्क के आधार पर 26 सितंबर, 1985 को शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया था और पी वी नरसिम्हा राव को इस मंत्रालय की कमान सौंप दी गई।

तब संस्कृति, युवा और खेल जैसे विभागों को शिक्षा से जुड़ा मानते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत लाया गया। इसके लिए राज्य मंत्री नियुक्त किए गए। यहां तक कि महिला और बाल विकास विभाग को भी इसके तहत रखा गया था। (2006 में महिला एवं बाल विकास भी एक अलग मंत्रालय बन गया था।)
राजीव गांधी सरकार के इस फैसले का उस वक्त काफी विरोध भी हुआ था। लोगों का कहना था कि देश में अब कोई शिक्षा विभाग ही नहीं बचा। लेकिन फैसला लिया जा चुका था। इसके बाद सरकारें बदलीं और मंत्रालय के आकार में भी बदलाव आते रहे।

1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो संस्कृति विभाग को एचआरडी मंत्रालय से अलग करने का फैसला लिया गया। अकटूबर 1999 में संस्कृति मंत्रालय नाम से एक मंत्रालय बनाया गया। इसकी जिम्मेदारी अनंत कुमार को सौंपी गई। इसके बाद भी एचआरडी मंत्रालय के दायरे को छोटा करने की कवायद चलती रही। युवा मामलों का विभाग अलग किया गया और उसका प्रभार भी अनंत कुमार को दिया गया। वाजपेयी सरकार के इन फैसलों के बाद एचआरडी मंत्रालय का सिर्फ नाम ही एचआरडी था, वास्तविक तौर पर उसका स्वरूप और कार्यक्षेत्र शिक्षा मंत्रालय वाला ही था।

पी वी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री बनने के बाद एचआरडी की कमान कई दिग्गज नेताओं के हाथों में रही। उनके बाद इस मंत्रालय की बागडोर अर्जुन सिंह, माधवराव सिंधिया, एसआर बोमई, मुरली मनोहर जोशी, कपिल सिब्बल, एमएम पल्लम राजू, स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल निशंक (वर्तमान) के हाथों में रही।

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