राज्यसभा चुनाव: लखनऊ में राजनीतिक दलों का सियासी पारा चरम पर पहुंचा

लखनऊ ब्यूरो। यूपी की दस राज्यसभा की सीटों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में घमासन तेज हो गयी है। सत्ता पक्ष ने अपने नवें उम्मीदवार की जीत के लिए मतदान से एक दिन पहले जोड़-तोड़ तेज कर दी है, जबकि विपक्ष ने अपने दूसरे उम्मीदवार की जीत के लिए सभी विधायकों को एकजुट करने के लिए व्हिप जारी कर दिया है। जेल में बंद सपा के एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक को लेकर विपक्ष की रणनीति गड़बड़ होने की चर्चा है। विपक्ष के एक उम्मीदवार का रास्ता साफ है जबकि उसके दूसरे उम्मीदवार को लेकर बात साफ नहीं है। हालांकि वह अपने दूसरे और सत्ता पक्ष अपने नौवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर पाता है कि नहीं, यह 23 मार्च को ही पता चलेगा।

राज्यसभा चुनाव के मददेनजर भाजपा अपने सहयोगियों के साथ 324 विधायकों को प्रथम और द्वितीय वरीयता के उम्मीदवारों को कैसे मतदान कराना है, उसका मॉक पोल करा चुकी है। भाजपा की बैठक में सपा से भाजपा में आये नरेश अग्रवाल एवं उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल मौजूद थे। इस बैठक में सपा की सहयोगी निषाद पार्टी के एक मात्र विधायक विजय मिश्र और पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के पुत्र अमनमणि त्रिपाठी भी मौजूद थे। भाजपा के इस बैठक को लेकर कयास लगाया जा रहा था कि कांग्रेस के दो, सपा के दो और निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह व विनोद सरोज बैठक में शामिल हो सकते हैं, लेकिन भाजपा के बैठक में 327 विधायक मौजूद रहे।

विपक्ष ने रणनीति के तहत अपने विधायकों को रोकने के लिए कांग्रेस ने बसपा के प्रत्याशी के पक्ष में व्हिप जारी किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लखनऊ पहुंचकर अपनी नजर गड़ाये हुए हैं। वहीं सपा ने प्रदेश मुख्यालय पर विधायकों की बैठक की। बैठक में लगभग आठ विधायक नहीं मौजूद रहे। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव, आजम खान एवं उनके पुत्र, सपा के एक विधायक जेल में हैं, चार विधायक निजी कारणों से बैठक में नहीं पहुंच पाये थे। बैठक में आठ विधायकों के न पहुंचने पर सपा ने रात्रि भोज का आयोजन किया। रात्रि भोज में सभी विधायकों और अखिलेश के चाचा शिवपाल ङ्क्षसह यादव और निर्दलीय विधायक राजा भैया पहुंचेे। इस भोज में सपा के आमंत्रित सभी विधायकों के उपस्थित रहने पर सपा का मनोबल काफी बढ़ गया।

जेल में बंद सपा के एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक को वोट डालने के लिए कोर्ट की परमीशन का इंतजार है। जब तक परमीशन नहीं मिल जाता, सपा की गणित पूरी तरह फिट बैठती नहीं दिख रही है। २२ मार्च को इन दोनों विधायकों के प्रति कोर्ट का निर्णय आना है। इसी क्रम में बसपा ने अपने सभी विधायकों को बुलाकर लखनऊ नहीं छोडऩे का निर्देश दिया है। राज्यसभा का चुनाव २३ मार्च को होना है। चुनाव से पूर्व यूपी की राजधानी लखनऊ में चुनावी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है।

उत्तर प्रदेश से कुल 10 उम्मीदवार इस बार राज्यसभा पहुंचेंगे। बीजेपी के 8 उम्मीदवार अरुण जेटली, अशोक बाजपेयी, विजय पाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता करदम, अनिल जैन, हरनाथ सिंह यादव और जीवीएल नरसिम्हा राव राज्यसभा पहुंच रहे हैं तो समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को अपना एकमात्र टिकट दिया है। बसपा की ओर से भीमराव अंबेडकर को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि निर्दलीय उम्मीदवार अनिल अग्रवाल का बीजेपी समर्थन कर रही है। राज्य में कुल 403 सीटें हैं जिनमें से बीजेपी व सहयोगी दलों के पास 324 सीटें हैं। सपा के पास 47, बसपा के पास 19 और कांग्रेस के पास 7 सीटें हैं। ऐसे में बीजेपी के 8 उम्मीदवारों और सपा की ओर से जया बच्चन का तो राज्यसभा जाना तय लग रहा है, लेकिन 10वीं सीट के लिए कड़ा मुकाबला हो सकता है क्योंकि सपा के बचे 10 वोट और कांग्रेस के 7 वोट भी बसपा को मिल जाते हैं तो भी उसे एक वोट की जरूरत होगी। ऐसे में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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