राज्यसभा में अब बीजेपी हुई मजबूत, लेकिन एनडीए बहुमत से दूर

दिल्ली ब्यूरो: राज्यसभा की तस्वीर बदल गयी है। अब बीजेपी के पास उच्च सदन में सबसे ज्यादा सांसद हो गए हैं लेकिन विपक्ष के सामने एनडीए को अभी भी बहुमत नहीं है। पहले कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा सीटें थी लेकिन अब बीजेपी 69 सीटों के साथ आगे आ गयी गई ,कांग्रेस चार सीटें खो कर 50 पर सिमट गयी है।

बता दें कि राज्यसभा की 58 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनावों के नतीजे आने के बाद राज्यसभा में अब भाजपा के खाते में 11 सीटों की वृद्धि हुई है जबकि कांग्रेस ने अपनी चार सीटें खो दीं हैं। इसके साथ ही अब संसद के इस उच्च सदन में भगवा पार्टी की स्थिति उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले काफी मजबूत हो गयी है। कल हुए चुनाव में भाजपा के 28 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस तरह से भाजपा को 11 सीटों का फायदा हुआ है, तो वहीं कांग्रेस ने केवल 10 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि पहले उसका इनमें से 14 सीटों पर कब्जा था। इस तरह पार्टी को चार सीटों का नुकसान हुआ है।

आंकड़ों की गणना यह दर्शाती है कि 245 सदस्यीय सदन में अब भाजपा की सीटों की संख्या मौजूदा 58 से बढ़कर 69 हो जाएगी और कांग्रेस की सीटें अब 54 से गिरकर 50 रह जाएगी। नए सांसदों का शपथ ग्रहण अगले हफ्ते होगा। हालांकि, भाजपा नीत गठबंधन राजग राज्यसभा में बहुमत से अब भी दूर है। पार्टी को अभी हाल ही में एक झटका लगा है जब चार साल से उसकी सहयोगी रही तेलुगु देशम पार्टी ने उससे नाता तोड़ लिया। सदन में इस समय तेदेपा के छह सदस्य हैं। बहरहाल, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे अपने प्रमुख विपक्षी दलों की संख्या में गिरावट से भाजपा खेमा काफी उत्साहित है। सपा की झोली में केवल एक सीट आयी है जबकि सदन में उसके छह सदस्यों का कार्यकाल अब खत्म होने जा रहा है।

भाजपा के सूत्रों ने बताया कि सरकार अब सदन में पहले से काफी आसान स्थिति में है क्योंकि सरकार के विधायी एजेंडे पर अनाद्रमुक, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस और बीजद जैसे राजग के बाहर वाले क्षेत्रीय दलों केउसे समर्थन मिलने की संभावना है। पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण मोदी सरकार द्वारा लाये गये विधेयक लोकसभा में पारित हो जाने के बावजूद राज्यसभा में आकर अक्सर अटक जाते हैं।

लोकसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। राज्यसभा में विपक्षी दलों के एकजुट हो जाने से मोदी सरकार को विधेयक पारित कराने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली अप्रत्याशित जीत से उसे सदन में अपनी संख्या बढ़ाने में मदद मिली है, जबकि कांग्रेस के हाथ से कई राज्यों की सत्ता जाने के बाद उसकी स्थित सदन में लगातार कमजोर होती जा रही है।

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