राज्यों के बीच नदी जल बंटवारे के विवाद सुलझाने के लिए बनेगा स्थायी ट्रिब्यूनल

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच विवाद के समाधान के लिए गठित नौ न्यायाधिकरणों को समाप्त करके एक स्थायी न्यायाधिकरण बनाने का फैसला किया है जिसमें हर विवाद का समाधान दो साल के भीतर किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बुधवार को यहां हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि एक नदी अगर कई राज्यों से बहती है तो उसके पानी के बंटवारे को लेकर विवादों के समाधान के लिए न्यायाधिकरणों का गठन किया जाता है जो लंबे समय तक चलते रहते हैं। इस समय नौ न्यायाधिकरण हैं जो 17 से 27 साल के दौरान गठित किये गये लेकिन किसी भी विवाद का अंतिम समाधान नहीं कर पाए।

जावड़ेकर ने कहा कि राज्यों के जल विवाद के समाधान के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि सभी न्यायाधिकरणों को समाप्त करके एक स्थायी न्यायाधिकरण बनाया जाएगा जाएगा जो प्रत्येक विवाद का दो साल की मीयाद के भीतर समाधान करेगा। विभिन्न स्थानों पर न्यायाधिकरण की शाखाएं खोली जा सकतीं हैं।

इससे पुराने विवादों का पटाक्षेप हो सकेगा और राज्यों के असंतोष को समाप्त किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) विधेयक 2019 संसद के मौजूदा सत्र में लाया जाएगा। विधेयक में स्थायी समिति की सिफारिशों को जगह दी गई है।

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