रात होते ही श्मशान पहुंच जाती है ये लड़की, वजह जानकर आपको न होगा यकीन

कभी-कभी जिदंगी ही इंसान को सही राह पर चलना सीखा देती है. शायद आपने भी ऐसे लोगों के बारे में सुना होगा जो किसी ना किसी घटना से कुछ सीखे हैं और उन्होंने कुछ अलग करके दिखाया. अभी तक आपने सुना होगा कि हर इंसान की कमियाबी के पीछे एक औरत का हाथ जरूर होता है लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कमियाबी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पीछे एक घटना का रहस्य है.

दरअसल हम जिस लड़की की बात कर रहे हैं वो और कोई नहीं बल्कि हैदराबाद की श्रुति रेड्डी हैं. श्रुति रेड्डी पेशों से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं लेकिन अचानक उनका दिमाग ने पल्टी खाई और उन्होंने अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़कर श्रुति श्मशान घाट में घूमने लगी और उसके बाद तो…

दरअसल कुछ समय पहले ही श्रुति रेड्डी के दादा जी की मृत्यु हो गई थी. श्रुति रेड्डी के घरवालों को दादा जी के अंतिम संस्कार के लिए जरूरी सामान इक्ट्ठा करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. श्रुति रेड्डी ने उसी वक्त से ही श्मशान घाट पर जाना शुरु कर दिया. श्रुति रेड्डी को अकेला श्मशान घाट पर देखकर उन्हें लोग गलत नजर से देखते थे लेकिन श्रुति रेड्डी ने हार नहीं मानी. उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था.

जी हां…श्रुति रेड्डी श्मशान घाट मुर्दों को अंतिम संस्कार करने के लिए जरूरी सामान जल्दी मुहिया कराने की प्लानिंग करने लगी थीं, ताकि लोगों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े. फिर क्या…श्रुति रेड्डी ने पता लगाया कि हर रोज काफी मात्रा में लोगों की मौत होती है, ऐसे में उन्हें सामान मुहिया करवाने के लिए एक कंपनी खोली जहां 24 घंटे अंतिम संस्कार का सामान लिया जाता है. धीरे-धीरे श्रुति रेड्डी की ये कंपनी तरक्की की राह पकड़ने लगी और उन्होंने अपने साथ करीब 4-5 लोगों को और जोड़ लिया जो उनके साथ सामान भिजवाने में मदद करते हैं.

हालांकि श्रुति रेड्डी के लिए भी ये सब आसान नहीं था. श्रुति रेड्डी का कहना है कि लोगों ने उन्हें बहुत मना किया कि ये काम अच्छा नहीं है. यहां तक श्रुति रेड्डी की मां ने उनसे दो महीने तक बात नहीं की और परिवार वालों ने इसका विरोध किया लेकिन श्रुति रेड्डी ने एक ना मानी और अपना बिजनैस खड़ा कर दिया. आज श्रुति ‘अंत्येष्टि’ फ्यूनरल सर्विसेज नाम से स्‍टार्टअप चलाती हैं.

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