राफेल डील पर बड़ा खुलासा, घिर सकती है मोदी सरकार

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: राफेल डील पर मोदी सरकार घिरती नजर आ रही है। संसद में अपने डेढ़ घंटे के भाषण में पीएम मोदी ने वंशवाद ,लोकतंत्र ,कांग्रेस की कमियाँ और सरकार की योजनाओं को लेकर बहुत साड़ी बातें कही ,लेकिन विवादित राफेल डील पर कुछ भी नहीं कहा। उधर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल किया कि मोदी जी राफेल पर क्यों नहीं बोलते। डील को पुलिस डोमेन में क्यों नहीं रखते। कई और सवाल राहुल गाँधी ने उठाये हैं।

उधर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अब डील को लेकर नया खुलासा किया है। भूषण ने अपने ट्विटर अकाउंट पर जानकरी देते हुए बताया है कि जहाज़ बनाने वाली अनिल अम्बानी की कंपनी रिलायंस डिफेन्स को 28 मार्च 2015 को रजिस्टर किया गया था और इसके दो हफ्ते बाद ही मोदी सरकार ने पुराने राफेल डील को रद्द कर फ़्रांस के साथ नई डील पर हस्ताक्षर कर लिए। प्रशांत भूषण के इस ट्वीट के बाद कई सवाल तैरने लगे हैं। पहला सवाल तो यही है कि किसी विल्कुल नयी कंपनी को डिफेंस का काम कैसे दिया जा सकता है वह भी तब जब उसके पास इस तरह की का कोई अनुभव नहीं है।

माना जा रहा है कि राफेल डील को कुछ ना कुछ आंत्रिक गड़बड़ियां है जो सामने नहीं आ रही। इसी वजह से इस मसले पर मोदी सरकार घिरती जा रही है। एक तरफ सरकार इस डील में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों को नकार रही है और दूसरी तरफ डील को लेकर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। आपको बता दें कि राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अम्बानी को फायदा पहुँचाया है।

गौरतलब है कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 540 करोड़ थी। इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर बनाती।

2015 में मोदी सरकार ने इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए नई डील की। नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1640 करोड़ होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी बनाएगी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

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