लॉकडाउन में हो गया कमाल, 50 साल बाद गंगा में ऐसा बदलाव, लौटीं 7 प्रजाति की मछलियां

नई दिल्ली: कोरोना संकट काल में मानव जाति त्राहिमाम कर रही है । सरकारें परेशान हैं, बीमारों को बचाने के लिए युद्धस्‍तर पर देश काम कर रहे हैं । लेकिन लाखों की जान ले चुका कोरोना अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है । संक्रामक बीमारी होने के कारण लॉकडाउन ही एकमात्र वजह बची । लगभग 2 महीने के लॉकडाउन में मानों प्रकृति को भी वक्‍त मिल गया, खुद को संवारने का । नतीजे हैरान करने वाले हैं । विशेष तौर पर गंगा, इस पवित्र नदी को स्‍वच्‍छ करने के लिए सरकारों ने कितना पैसा पानी की तरह बहा दिया लेकिन असर अब जाकर दिखना शुरू हुआ है ।

मछलियों की घर वापसी
खबर काशी से है, वाराणसी के घाट पर बहता गंगा का पानी निर्मल औ स्‍वच्‍छ हो गया है । हैरान करने वाली बात ये कि नदी के पानी में कई ऐसी प्रजातियों की मछलियों ने वापसी की है जो कि गायब हो गई थीं । जानकारों के अनुसार मछलियों की सात प्रजातियां घर लौट आई हैं । मां गंगा की लहरों में ये मछलियां फिर से अठखेलियां करने लगी हैं । विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ गई है ।

50 सालों में बड़ा सुधार
पिछले 50 सालों में गंगा का जल जिस तरह से प्रदूषित हुआ है इस लॉकडाउन में उतनी ही तेजी से वो स्‍वच्‍छ भी हो गयया है । मार्च के महीने में जनता कर्प्यू से लेकर अगले 40 दिनों तक गंगा में औसतन घुलनशील आक्सीजन की मात्रा नौ और दस के करीब रही । किसी – किसी दिन ये 11 और 12 तक भी पहुंची । गंगा का निर्मल जल दूर से देखने में ही खूसूरत प्रतीत हो रहा है । 50 सालों बाद इतना सुधार दिखा है । गंगा नदी में फैक्टियां बंद होने से जहां केमिकल नहीं गिरा, तो वहीं कृत्रिम रंग भी नहीं डाले गए । परिणाम साफ है, मछलिया जो प्रदूषण के कारण घर छोड़ गईं थीं वो अब लौट आई हैं ।

7 प्रजातियों की मछलियां दिखीं
काशा में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ कालिका सिंह के मुताबिक मछलियों की वो सात प्रजातियां जो किसी जमाने में काशी की गंगा में दिखाई देती थीं, लेकिन प्रदूषण के कारण दिखना बंद हो गई, वो फिर से लौट आई हैं । इन सात नस्लों में करौंछी, भाकुरी, सिंघा, बैकरा, घेघरा, नयन और रीठ प्रजाति की मछलियां शामिल हैं । इन मछलियों की अपनी – अपनी खासियतें भी हैं । बड़ी मछलियों के साथ छोटी मछलियों का दिखना भी अच्‍छा माना जा रहा है ।

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