वरिष्ठ पत्रकार हेमंत पाल का सवाल-‘ताई’ इतनी काबिल तो, फिर टिकट क्यों काटा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को चुनावी सभा को संबोधित करने इंदौर आए थे! उन्होंने अपनी लच्छेदार बातों से भीड़ को जमकर प्रभावित किया! लोगों से तालियां भी बजवाई! पर, अपने पीछे कुछ अनुत्तरित सवाल छोड़ गए, जिनका जवाब नहीं मिल रहा! मोदी ने मंच से सुमित्रा महाजन ‘ताई’ की जमकर तारीफ की! लोकसभा संचालन की उनकी कुशलता को सराहा! आत्मीयता का प्रदर्शन भी किया! लेकिन, ये राज नहीं खोला कि उन्हें इंदौर से 9वीं बार लोकसभा के लिए उम्मीदवारी क्यों नहीं दी गई? जाते हुए मोदी ने ‘ताई’ से खाने की फरमाइश की, तो उनके लिए ‘ताई’ के घर से खाना तक एयरपोर्ट पहुँचाया गया! यानी कि इंदौर के नमक का कर्ज उन पर बाकी रह गया, जो अब कभी चुकता नहीं होगा! मोदी ने ये भी कहा कि सुमित्रा ‘ताई’ पूरे मध्यप्रदेश को चुनाव लड़वा रही है! जबकि, सच्चाई तो ये है कि वे पूरा प्रदेश तो छोड़, इंदौर में भी भाजपा को चुनाव नहीं लड़वा रहीं!

शहर में ये सवाल सुलग रहा है, कि ‘ताई’ को भाजपा ने किस गलती की सजा दी? क्योंकि, नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में सुमित्रा महाजन के बारे में जो कहा, उसके कयास नहीं लगाए गए थे। ‘ताई’ की कार्य कुशलता, संगठनात्मक काबलियत, नेतृत्व क्षमता की मोदी ने खासी सराहना की गई! इंदौर में सभा तो भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी के लिए की, लेकिन मंच पर जलवा रहा सुमित्रा महाजन का! इस भीड़ भरी सभा का सबसे दिलचस्प पहलू था मंच पर ‘ताई’ के प्रति नरेंद्र मोदी की आत्मीयता का प्रदर्शन और उनकी तारीफ! मोदी ने लोकसभा संचालन में उनकी कुशलता के पुल बांधे! लेकिन, ये नहीं बताया कि इतनी सक्षम नेता को इंदौर से 9वीं बार उम्मीदवारी क्यों नहीं दी गई! उनकी कुशलता और क्षमता में ऐसी कौनसी खामी दिखी कि उन्हें खुद ही टिकट की दौड़ से हटने के लिए मजबूर किया गया।   इंदौर लोकसभा सीट से लगातार 8 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाली सुमित्रा महाजन (ताई) के 9वीं बार चुनाव लड़ने में किसी को शंका नहीं थी! ये मान लिया गया था कि उनका विकल्प बनने माद्दा इंदौर के किसी नेता में नहीं है! लेकिन, जो हालात बने, उससे पांसा पलट गया।

ऐसी राजनीतिक स्थिति बन गई (या बना दी गई) कि ‘ताई’ को खुद ही मीडिया को सार्वजानिक चिठ्ठी लिखकर मैदान से हटने का एलान करना पड़ा! मोदी की सभा ने इस घाव को फिर कुरेदकर सवाल जिंदा कर दिया है! यदि सुमित्रा महाजन में अद्भुत नेतृत्व क्षमता है! उन्होंने लोकसभा का सफल संचालन किया और संगठनात्मक रूप से भी वे बेजोड़ हैं तो फिर उनकी अयोग्यता की वजह क्या रही? क्या सिर्फ 75 साल का फार्मूला या फिर कोई अनबूझ कारण है? मालवा-निमाड़ की मंदसौर और खंडवा लोकसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा सबसे पहले की गई, पर इंदौर को महीनेभर तक होल्ड पर रखा गया! लगातार टाला जाता रहा, जब तक ‘ताई’ सम्मान की खातिर खुद मैदान से नहीं हटी!   सभा में मोदी ने कहा कि इंदौर से मेरा विशेष स्नेह रहा है! क्योंकि, ये सुमित्रा ताई का शहर है। उन्होंने 8 बार सांसद और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। अपने भाषण में उन्होंने करीब दस बार सुमित्रा महाजन का नाम लिया। मंच पर भी दोनों में काफी आत्मीयता दिखी! दोनों नजदीक ही बैठे थे, क्योंकि ये प्रोटोकाल की जरुरत थी। मोदी का कहना था कि हमारी पार्टी में यदि कोई मोदी को डांट सकता है, तो वे सिर्फ ‘ताई’ हैं। काम के प्रति उनके समर्पण को ध्यान में रखते हुए मैं इंदौर को विश्वास दिलाता हूं कि शहर के विकास के मामले में ‘ताई’ की कोई इच्छा अधूरी नहीं रहेगी। इतना प्यार दोगे इंदौर वालों तो ‘ताई’ को मुझे खाना खिलाना पड़ेगा।

बताते हैं कि नरेंद्र मोदी ने जाते समय ‘ताई’ से ये भी कहा कि बहुत भूख लगी है, भोजन लाई हो, तो गाड़ी में खा लूंगा। इस पर ‘ताई’ ने कहा कि सुरक्षा कारणों से नहीं ला पाई। बाद में उन्होंने बेटे मंदार को फोन करके खाना एयरपोर्ट भिजवाया और प्रधानमंत्री के स्टॉफ को सौंपा।   बात सिर्फ ‘ताई’ को टिकट से वंचित करने तक सीमित नहीं है! मसला ये भी है कि इसका कोई कारण या राजनीतिक मज़बूरी सामने नहीं आ सकी! आम्बेडकर जयंती पर जब सुमित्रा महाजन लोकसभा परिसर में हुए कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली गईं थी, तब ये समझा जा रहा था कि शायद टिकट को लेकर अटका हुआ मसला सुलझ जाएगा और ‘ताई’ फिर इंदौर का नेतृत्व करने में सफल रहेंगी! लेकिन, बताते हैं कि नरेंद्र मोदी ने वहाँ उनसे कोई तवज्जो नहीं दी! इंदौर के एक पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन ने तो खुलेआम ‘ताई’ को टिकट दिए जाने का विरोध किया! उन्होंने धमकी तक दी, कि यदि उन्हें टिकट दिया गया, तो वे भी चुनाव लड़ेंगे! इन अनुशासनहीनता की भी पार्टी ने अनदेखी की!  जिस मंच से नरेंद्र मोदी ने सुमित्रा महाजन की काबलियत का परचम लहराया, उस मंच पर पहले तो ‘ताई’ का फोटो तक नहीं लगाया गया था! बाद में खुद ‘ताई’ के आपत्ति लेने आनन-फानन में फोटो लगा! सुमित्रा महाजन को पहले टिकट से वंचित करने और बाद में उनको सर पर बैठाने का जो कारनामा कल इंदौर में दिखाई दिया, वो पार्टी की कोई रणनीति है या मज़बूरी? इस सवाल की खदबदाहट शहर में महसूस की जा रही है!

(लेखक ‘सुबह सवेरे’ इंदौर के स्थानीय संपादक हैं)…

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