वायु प्रदूषण से धूम्रपान न करने वालों के फेफड़े भी हो रहे काले : डॉ. सूर्यकांत

लखनऊ ब्यूरो। वायु प्रदूषण के कारण अब धूम्रपान न करने वालों के फेफड़े भी स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान काले दिख रहे हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि अब वायु प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव को नकारने के बजाये स्वच्छ हवा को स्वच्छ भारत मिशन का अहम् हिस्सा बनाए जाने का वक्त आ गया है। यह बातें किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के पल्मोनरी रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. सूर्यकान्त ने कही।

क्लाइमेट एजेंडा द्वारा लखनऊ में गुरुवार को वायु प्रदूषण के खिलाफ 10 दिवसीए जागरूकता अभियान का शुभारम्भ किया गया। अभियान का शुभारम्भ लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया उच्च क्षमता वाले फिल्टर युक्त एक जोड़ा कृत्रिम फेफड़ा नगर निगम कार्यालय के सामने स्थापित कर किया गया। इस मौके पर नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी और क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर भी उपस्थित थी।

महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि हर वर्ष लखनऊ की हवा काफी प्रदूषित हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण अब हमारे स्वास्थ्य व खुशहाली के खिलाफ एक बड़ा खतरा बन चुका है। सौर ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा आधारित मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली एवं स्वच्छता से ही हमारे शहर की हवा स्वच्छ की जा सकती है।

डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले फिल्टर और पंखों के उपयोग से बनाये गए फेफड़े वास्तविक फेफड़ों की तरह ही कार्य करते हैं। वायु प्रदूषण के असर से अगले दस दिनों में इनका काला हो जाना आम लोगों को प्रदूषण के असर को बारीकी से देखने समझने में सहयोग करेगा।

नगर आयुक्त डाॅ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि आम लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है, तभी वायु प्रदूषण को हराया जा सकेगा। इसके लिए नगर निगम अपनी ओर से अथक प्रयास कर रहा है, लेकिन शहर की आबोहवा को सांस लेने योग्य स्वच्छ करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना पड़ेगा। फेफड़ों को स्थापित कर की जा रही ये गतिविधि निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन लायेगी।

जागरूकता अभियान के बारे में एकता शेखर ने कहा कि आज स्थापित किये गए कृत्रिम फेफड़ों को बनाने में अति उच्च क्षमता वाले फिल्टर का उपयोग किया गया है, जो प्रदूषण के प्रभाव में आकर कुछ दिनों में स्वतः काले हो जायेंगे। ऐसा करके हम यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों और स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बताया कि अगले दस दिनों तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

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