वाराणसी में भारत बंद के समर्थन में दलित ओबीसी संगठन सड़क पर, निकाला विरोध मार्च

वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध और भारत बंद के समर्थन में सोमवार को धर्म नगरी काशी में दलित और ओबीसी संगठनों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। एससी-एसटी ओबीसी संघर्ष समिति के बैनर तले लंका स्थित बीएचयू के सिंहद्वार, कचहरी स्थित अम्बेडकर पार्क, महात्मा गांधी काशी विद्वापीठ के मुख्य द्वार के निकट जुटे कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाल चक्काजाम कर जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान लंका क्षेत्र में कार्यकर्ताओं ने दुकानें भी बन्द कराने का प्रयास किया, जिससे वहां अफरातफरी मची रही। हालांकि मौके पर भारी फोर्स के साथ मौजूद पुलिस अफसरों ने मोर्चा संभाल अराजकता फैलाने वालों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। दलित संगठनों के भारी विरोध को देख सुरक्षा का व्यापक प्रबन्ध किया गया हैं।

एससी-एसटी कानून में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों की ओर से देश भर में भारत बंद के आह्वान को देख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पुलिस अफसर पहले से ही तैयार थे। सुबह शहर के अधिकांश क्षेत्रों में बाजार सामान्य दिनों की भांति खुला। लंका स्थित बीएचयू के सिंह द्वार पर और कचहरी स्थित अम्बेडकर पार्क में दलित और ओबीसी संगठनों के कार्यकर्ता पदाधिकारी जुटने लगे। लंका में दलित संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं अध्यापकों ने विरोध मार्च निकाल खुली दुकानों को बंद करवाना शुरू कर दिया। यह देख सतर्क लंका पुलिस ने कार्यकर्ता के इर्द-गिर्द घेरा बंढ़ा दिया। इससे क्षुब्ध कार्यकर्ता सड़कों पर लेट प्रदर्शन करने लगे।

उधर कचहरी स्थित अम्बेडकर पार्क के निकट रन फार अम्बेडकर के कार्यकर्ताओं ने चक्काजाम कर दिया। सूचना पाते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें समझा बुझा कर हटाना चाहा तो कार्यकर्ता पुलिस कर्मियों से धक्कमुक्की पर उतर आये। पुलिस बल ने लाठी पटक कर उन्हें हटाया। समाचार लिखे जाने तक लंका, महात्मा गांधी काशी विद्वापीठ और कचहरी अम्बेडकर पार्क में दलित सगठनों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।

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