विवादों में आए कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से आज सीबीआई की पूछताछ

दिल्ली ब्यूरो: विवादों में आये कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से शिलॉन्ग में आज सीबीआई पूछताछ करेगी। राजीव कुमार शिलॉन्ग पहुँच गए है। यह पूछताछ किसी गुप्त स्थान पर होने की संभावना बताई जा रही है। राजीव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने सारदा और अन्य पोंजी घोटाले से संबंधित दस्तावेजों को नष्ट करने का प्रयास किया है। वह 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह सारदा एवं अन्य पोंजी घोटाला मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी के प्रमुख थे। राजीव कुमार सहित कुछ हाई प्रोफाइल संदिग्धों से पूछताछ के दौरान अतिरिक्त श्रम बल मुहैया कराने के लिए सीबीआई ने दिल्ली, भोपाल और लखनऊ इकाई के दस अधिकारियों को भेजा है। खबर के मुताविक पूछताछ के लिए दिल्ली से कई प्रमुख विशेष पुलिस अधिकारी को भेजा गया है।

बता दें कि यह घोटाला करीब 40 हजार करोड़ का बताया जा रहा है। इसके तहत आम लोगों को यह भरोसा दिया गया था कि उनका पैसा 34 गुना अधिक कर वापस किया जाएगा। कुल 10 लाख लोगों ने इसमें पैसे निवेश किए थे। प. बंगाल, ओडिशा और असम के लोगों ने अपना पैसा लगाया था। बाद में जब लोगों को पैसे नहीं दिए गए, तो मीडिया में यह खबर आने लगी। इसमें कई राजनीतिक दलों और नेताओं के नाम सामने आए.मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सारदा ग्रुप ने बंगाल, झारखंड, ओडिशा और उत्तर पूर्व के राज्यों में अपने दफ्तर खोल लिए थे। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए।

बता दें, इस मामले में पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम भी आरोपी हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने सारदा के प्रमुख सुदीप्तो सेन के साथ मिलकर साल 2010 से 2012 के बीच 1.4 करोड़ रुपये लिए थे। गौरतलब है, कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सारदा और रोज वैली चिटफंट घोटाले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख रह चुके हैं। आरोप लग रहा है कि राजीव कुमार ने जांच को प्रभावित किया। सबूतों के साथ छेड़छाड़़ की।

रोज वैली पोंजी योजना घोटाला का खुलासा 2013 में हुआ था। इस समूह के चेयरमैन गौतम कुंडू थे. समूह ने कथित तौर पर 27 कंपनियां शुरू की थीं। इसने कथित तौर पर पश्चिम बंगाल, असम व बिहार के जमाकर्ताओं से 17,520 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। प्रवर्तन निदेशालय ने इसके रिसॉर्ट, होटलों व भूमि को कुर्क किया था, जिसकी कीमत 2,300 करोड़ रुपये थी। घोटाले से जुड़े मामले में आभूषणों के शोरूम की तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज व सोने के आभूषण व कीमती पत्थर बरामद किए थे।

बता दें कि प. बंगाल के सीएम ममता बनर्जी तीन फरवरी को उस समय धरने पर बैठ गईं, जब उन्हें यह पता चला कि कोलकाता पुलिस प्रमुख को सीबीआई गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि, सीबीआई ने बताया था कि वह उनसे सिर्फ पूछताछ करना चाहती है. ममता न सिर्फ धरने पर बैठीं, बल्कि उन्होंने सभी विपक्षी दलों से भी संपर्क साधा। कांग्रेस समेत दूसरे दलों ने उन्हें नैतिक समर्थन दिया। कुछ दलों के प्रतिनिधि भी उनसे मिलने पहुंचे. इन लोगों ने पीएम मोदी पर संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने उनके सारे आरोपों को निराधार बताया।

दरअसल, दो महीने बाद लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में हर दल राजनीति करना चाहती है। जनता के बीच किस तरीके से संदेश ले जाया जाना है, इसी पर राजनीति हो रही है. प. बंगाल में भाजपा लगातार कोशिश कर रही है कि वह बड़ी सफलता हासिल करे।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- -----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper