विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान पर कहा, खपत बढ़ाना महत्वपूर्ण

नई दिल्ली: सरकार द्वारा एक तरफ निवेश व वृद्धि के लिए एफडीआई को खोलने और दूसरी तरफ स्वदेशी उत्पादों को खरीदने की अपील करने को उद्योग ने इसे विरोधाभासी बयान बताया है। उद्योगों ने कहा कि है कि इससे खपत पर असर पड़ने की संभावना है, जो कम हो रही है।

बेंगलोर स्थित ब्रांड व खुदरा विशेषज्ञ हरीश बिजूर ने कहा, “भारत की स्थिति में एक अंतर्निहित विरोधाभास है, जब हम विदेशी निवेशकों से बात करते हैं तो हम उनकी मौजूदगी का स्वागत करते हैं। लेकिन जब हम भारतीयों से बात करते हैं तो उन्हें भारतीय उत्पाद खरीदने को कहते हैं। वर्तमान में जो महत्वपूर्ण है, वह खपत बढ़ाना है। चाहे वह विदेशी हो या स्थानीय।”

2019 के अपने अंतिम मन की बात संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादों को खरीदने की अपील की। उन्होंने लोगों से अगले दो से तीन साल 2022 तक स्थानीय उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। 2022 में भारत अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “क्या आप यथासंभव अधिक से अधिक स्थानीय उत्पादों को खरीद सकते हैं।” उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए 100 साल पहले एक जन आंदोलन शुरू किया था और इसे आत्मनिर्भर बनने के साधन के रूप में देखा गया। फिर से स्वदेशी का उद्देश्य भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना व गरीबों के लिए समृद्धि लाना है।

ग्रांट थॉर्नटन एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रियाज थिंगना ने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वदेशी के लिए अपील आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक बयान है। उन्होंने कहा कि इससे विदेशी निवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। थिंगना ने कहा, “इस समय खपत को बढ़ाना समय की मांग है।”

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