शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद महागठबंधन से लड़ेंगे !

दिल्ली ब्यूरो: संसद सत्र का आखिरी दिन बुधवार। वैसे तो सत्र मंगलवार को ही ख़त्म हो गया था लेकिन सवर्ण आरक्षण बिल को राज्य सभा से पास कराने के लिए राज्यसभा एक दिन और चला। इसके बाद सब कुछ वैसा ही जैसा चल रहा था। लोक सभा चुनाव के चार महीने रह गए हैं। सभी राजनीतिक दलों की अपनी अपनी चुनौती है। किसी को फिर से सत्ता में लौटने की चुनौती है तो किसी को बीजेपी की राजनीति को चौपट कर नई सरकार बनाने की चुनौती है। गुरूवार के बाद सभी दल अपने अपने चुनावी अजेंडे पर निकल जाएंगे। सांसद दिल्ली से निकलकर अपने इलाके पहुँच जाएंगे जहां एक बार फिर जनता के सामने हाजिर होकर माफ़ी मांगेंगे और अबकी बार सब कुछ देने का वादा कर उसके पैरो पर नाक रगड़ेंगे। लोक तंत्र का यह तमाशा सालों से चलरहा है।

इस तमाशे के बीच बहुतों की नजर बिहारी बाबू शॉटगन और कीर्ति आजाद पर टिकी है। कई तरह के बयान आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि शार्टीघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद लड़ेंगे कहा से और किस पार्टी से। लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी अपने दोनों सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को टिकट नही देगी तय है। लेकिन तय यह भी है कि यह दोनों अपनी पुरानी सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। तय यह भी है कि यह दोनों ही महागठबंधन के ही उम्मीदवार होंगे। सिर्फ यह तय नही है कि पार्टी कौन सी होगी जिसके चुनाव चिन्ह पर यह मैदान में होंगें। सूत्रों के अनुसार दोनों ही कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन के उम्मीदवार होंगें। शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब से और कीर्ति आजाद दरभंगा से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगें।

शत्रुघ्न सिन्हा का लालू यादव परिवार के हर सदस्य से निजी व व्यक्तिगत सम्बन्ध है। लालू यादव से मिलने रांची भी जा चुके हैं। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि वह आरजेडी की टिकट से चुनाव लड़ेंगें। जबकि हकीकत यह है कि शत्रुघ्न सिन्हा के व्यक्तित्व को देखते हुए आरजेडी जैसी पार्टी में वह कम्फ़र्टेबल नही रह सकते। ऐसे में वह राष्ट्रीय पार्टी में रहना चाहेंगे व विकल्प है कांग्रेस।हालांकि जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल मुझे मेरे परिवार ने 14 जनवरी तक किसी तरह की औपचारिक घोषणा न करने की सलाह दी है। इसलिए अभी इस बारे में बात करना सही नहीं है, लेकिन लालूजी और उनके परिवार के लिए मेरी निकटता और प्रियता कोई रहस्य नहीं है।

कीर्ति आजाद का परिचय बीजेपी के बागी सांसद के साथ साथ क्रिकेटर का भी है। वैसे बीजेपी में यह भी कभी कम्फ़र्टेबल नही रहे। दरअसल, इनका परिवार कांग्रेसी पृष्ठभूमि का रहा है। इनके पिता स्व भागवत झा आज़ाद केंद्रीय मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी से इनके परिवार का वर्षों पुराना नाता व सम्बन्ध रहा है।

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