शिवराज सिंह चौहान को चापलूस कहने पर भड़के पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, दी पटवारी को नसीहत

भोपाल। कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चापलूस कहने पर सियासत गर्मा गई है। शिवराज के समर्थन में उतरकर बीजेपी नेता जमकर कांग्रेस और जीतू पर हमले बोल रहे है। इस बयानबाजी के बाद पूर्व मंत्री रामपाल सिंह ने जीतू को मंत्री पद की गरिमा का ख्याल रखने की नसीहत दी है, साथ ही सोनिया और कमलनाथ के पैर धोकर चरणामृत पीने की बात कही है।

दरअसल, सोमवार को मीडिया से चर्चा के दौरान शिवराज ने कश्मीर से धारा 370 हटाने पर पीएम मोदी और शाह की तारीफ की थी और कहा था कि मैं पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को अपना नेता मानता था लेकिन उनके इस फैसले के बाद अब मैं उनकी पूजा करता हूं।जिस पर पटवारी ने ट्वीट कर शिवराज पर जमकर हमला बोला और उन्हें चापलूस कह दिया।इस पर शिवराज सरकार में मंत्री रहे रामपाल भड़क गए और उन्होंने कहा कि पटवारी सोनिया गांधी और कमलनाथ का चरणामृत पिये, पर ऐसी बयानबाजी न करें। साथ ही उन्होंने पटवारी को नसीहत देते हुए कहा कि जीतू मंत्री पद की गरिमा का ख्याल रखें। वहीं इस मुद्दे पर प्रदेश राकेश सिंह ने कहा कि दिन ब दिन कांग्रेस के नेताओ का स्तर नीचे गिरता जा रहा है, ये बताता है कि उनके जहां सबकुछ ठीक नहीं है।

पटवारी ने ट्वीटर के माध्यम से कहा कि शिवराज जी, आप भाजपा में अपनी “साख” खत्म होने के डर से उसे बचाने के लिए मोदी-शाह की पूजा तो क्या उनके पैर धोके पानी पियो तो भी हमें कतई आपत्ति नहीं। लेकिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी पर टिप्पणी बार बार टिप्पणी आपके “मानसिक दिवालियापन” को दर्शा रहा है।जीतू ने कहा कि मप्र की सत्ता से बेदखल होने के बाद बीजेपी में अपना “अस्तित्व” बचाने के लिए मोदी-शाह की चापलूसी में मशगूल शिवराज जी मप्र की मर्यादा का ख्याल रखें। आप 13 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, मप्र की जनता को पहले एहसास था कि मुख्यमंत्री चुना लेकिन क्या पता था कि चापलूस चुना..।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper