‘संपूर्ण क्रांति’ की वापसी

नई दिल्ली: जय प्रकाश नारायण वह शख्सियत रहे हैं, जिन्होंने इंदिरा गांधी से नजदीकियां होने के बावजूद उनके खिलाफ 1977 में ‘संपूर्ण क्रांति’ का बिगुल फूंक दिया था। इंदिरा गांधी की सत्ता को ‘क्रांति’ निगल गई थी। इसी 11 अक्टूबर को लखनऊ में जय प्रकाश नारायण की जयंती के बहाने जो राजनीतिक हलचल हुई, उससे चर्चा निकली है कि नरेंद्र मोदी को सत्ता से दूर करने के लिए ‘एक क्रांति’ की तैयारी चल रही है। समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में आयोजित जय प्रकाश नारायण जयंती के कार्यक्रम में बिहारी शत्रुघ्न सिन्हा और यशवंत सिन्हा की उपस्थित ऐसा ही संकेत दे गई है। 1977 में ‘संपूर्ण क्रांति’ का शंखनाद बिहार से ही हुआ था।

भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के मंच पर आकर मोदी सरकार को तानाशाह बताते हुए बदलाव का आह्वान किया। जय प्रकाश नारायण ने भी इंदिरा गांधी को तानाशाह बताते हुए बदलाव का शंखनाद किया था। यूपी के पूर्व सीएम व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकेतों पर मुहर लगाते हुए कह ही दिया कि 1977 की संपूर्ण क्रांति की तरह इस बार यूपी से भाजपा का सफाया हो जाएगा।

भड़ासी तौर पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि मैंने चंद्रशेखर, मुलायम सिंह यादव के साथ काम किया है। जेपी को करीब से जाना है, लेकिन आज के छुटभैये नेता अपने को तीसमार खां समझते हैं। यशवंत सिन्हा ने कड़ी जोड़ते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का बचपन गरीबी में बीता, लेकिन क्या किसी को याद है कि उन्होंने कभी कहा हो कि वह गरीब परिवार से हैं। पीएम का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि वह दावा करते हैं कि वह चाय बेचते थे, लेकिन वह स्टेशन तो तब बना ही नहीं था।

फिल्मी करेक्टर के नाते शॉटगन नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा करते हैं कि भाजपा की राजनीति, लेकिन पिछले साढ़े चार साल से वह पीएम मोदी और उनकी नीतियों को निशाने पर रखते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रति उनका भाव नहीं बदला है, भाजपा उनकी प्राथमिकता पर ही है, लेकिन जैसे ही भाजपा मोदी-शाह की भाजपा हो गई, शत्रुघ्न सिन्हा बागी की भूमिका में हैं। वह कहते भी हैं कि सच कहना अगर बगावत है, तो हां मैं बागी हूं।
शत्रुघ्न सिन्हा की मित्र-शैली का नतीजा है कि वह लालू प्रसाद यादव के भी खास हैं, तो नीतीश के भी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नजदीक हैं। कांग्रेस-वाम मोर्चा से भी उनकी दोस्ती है। अब वह अखिलेश यादव के भी खास हो चुके हैं। इसी के साथ एक नई सियासी सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि सपा शत्रुघ्न सिन्हा को वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाने का मन बना रही है। शत्रुघ्न सिन्हा का जलवा और सपा का साथ सामने वाले पर भारी पड़ेगा।

– सच कहना अगर बगावत है, तो हां मैं बागी हूं। जुमलेबाजी से काम नहीं चलेगा। मैं पार्टी के खिलाफ नहीं हूं, मैं व्यक्ति विशेष के खिलाफ हूं। पार्टी में वन मैन शो टू मैन आर्मी वाली स्थिति में है। क्या सब कुछ एक व्यक्ति चलाएगा देश में?

– भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा

– आज भी देश में इमरजेंसी से बदतर हालात हैं। महाभारत की तरह दुर्योधन और दुशासन से आज फिर लडऩा है। ये जिम्मेदारी बूढ़ों को नहीं, बल्कि अखिलेश जैसे नौजवान को उठानी पड़ेगी। इस बार इन लोगों (भाजपा) की यूपी से छुट्टी होगी। यूपी से छुट्टी का मतलब है देश से छुट्टी होना।

– यशवंत सिन्हा

– जब यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा ने आवाज दी है, तो मैं कह सकता हूं कि यूपी और बिहार से भारतीय जनता पार्टी का सफाया होगा।

– पूर्व सीएम अखिलेश यादव

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