सपने ज्यादा, सच कम

लखनऊ: 2014 के आम चुनाव से पहले मोदी का चुनावी अभियान एक बेहतर भारत की उम्मीद के धागों से बुना गया था। उनका चुनावी नारा था- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं।’ इसके अलावा मोदी ने नौकरियां और रोजगार पैदा करने का वादा किया था। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्मेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस’ के फॉर्मूले पर चलने का वादा भी किया था। पांच साल बाद पता चला कि ‘अच्छे दिन’ भी किसी आम चुनावी नारे जैसा ही था। अब पेश अंतरिम बजट की सच्चाई पर विवेक कौल का विश्लेषण

अपने करीब पौने दो घंटे के बजट भाषण में कार्यकारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बॉलीवुड फिल्म ‘उरी : द सर्जिकल स्ट्राइक’ का जिक्र किया और बताया कि वह सिनेमा हॉल में दर्शकों का ‘जोश’ देखकर प्रभावित हुए। यह फिल्म कुछ साल पहले भारतीय सेना की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में अंध-राष्ट्रवाद दिखाया गया है। अगर बजट पेश होने से पहले इस बारे में थोड़ा-बहुत संदेह भी था कि क्या मोदी सरकार चुनावी बजट पेश कर रही है, तो यह उसी वक्त खत्म हो गया जैसे ही गोयल ने ‘उरी’ का जिक्र किया।

यह मोदी सरकार का अंतरिम बजट था। यानी सीधे शब्दों में कहा जाए, तो इसमें अगली सरकार चुने जाने तक के खर्च की योजना और लेखा-जोखा था। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं और उम्मीद है कि मई 2019 तक नई सरकार आ जाएगी। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को अपने गढ़े माहौल को काबू में रखना पसंद है। इसीलिए जाहिर है उनकी सरकार ने अंतरिम बजट जैसे बेशकीमती मौके को अपने हाथ से जाने नहीं दिया।

बजट में सबसे बड़ा ऐलान है- छोटे किसानों के लिए आॢथक मदद योजना। इस योजना के तहत उन किसानों के बैंक खाते में हर साल छह हजार रुपए सीधे भेजे जाएंगे, जिनके पास दो हेक्टेयर तक की खेती वाली जमीन है। गोयल के मुताबिक, इस योजना का फायदा देश के करीब 12 करोड़ छोटे और गरीब किसान परिवारों को मिलेगा। आमतौर पर एक भारतीय परिवार में औसतन पांच सदस्य होते हैं। इस हिसाब से देखा जाए, तो इस स्कीम से करीब 60 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। 60 करोड़ लोग, यानी वोट देने वालों की आधी संख्या से थोड़ा ही कम है।

शुरू होने के बाद यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी इनकम सपोर्ट स्कीम होगी। दिलचस्प बात यह है कि यह स्कीम एक दिसम्बर, 2018 यानी पिछले साल से लागू होगी और पैसों की पहली किश्त किसानों को 31 मार्च, 2019 से पहले दे दी जाएगी। सरकार ने इस साल स्कीम के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया है, जो अगले साल 750 अरब हो जाएगा। दिलचस्प यह भी है कि बजट से कुछ दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सत्ता में आने पर सभी के लिए न्यूनतम आय गारंटी स्कीम लाने का वादा किया था। उधर, मोदी सरकार की स्कीम में सबसे ज्यादा मुश्किल है यह पता लगाना है कि किसे स्कीम का फायदा मिलना चाहिए और किसे नहीं। भारत के ज्यादातर हिस्सों में जमीन का लेखा-जोखा बहुत ज्यादा विश्वसनीय नहीं है। दूसरा बड़ा सवाल वही है, जो हमेशा कायम रहता है- इतने सारे पैसे आएंगे कहां से? अर्थशास्त्र मानता है कि अगर किसानों को पैसे दिए जाएंगे, तो किसी न किसी को इसे ज्यादा टैक्स के रूप में चुकाना ही होगा।

इसके अलावा गोयल ने देश के बड़े असंगठित क्षेत्र के लिए पेंशन स्कीम की घोषणा भी की। वित्त मंत्री ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों की संख्या 42 करोड़ बताई है। असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए 60 साल की उम्र के बाद हर महीने तीन हजार रुपए पेंशन का प्रस्ताव दिया गया है। यह स्कीम उन्हीं लोगों के लिए होगी, जिनकी मासिक आय 15 हजार या इससे कम है। हालांकि इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए लाभार्थी को अपने भी कुछ पैसे लगाने होंगे। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले एक 18 साल के शख्स को हर महीने 55 रुपये जमा करने होंगे। सरकार भी उतनी ही रकम अपनी तरफ से डालेगी, तभी वह 60 साल की उम्र के बाद पेंशन का हकदार होगा।

इस स्कीम को भी लागू करने में कई बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले बड़े तबके को कैश में भुगतान किया जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार कैसे पता लगाएगी कि किसे इस पेंशन स्कीम के दायरे में रखा जाना चाहिए और किसे नहीं। वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट की परंपरा तोड़ते हुए मिडिल क्लास को बड़ा तोहफा दिया। अगले साल से पांच लाख रुपए तक की वाॢषक आय वाले व्यक्ति को कोई टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स छूट की वर्तमान सीमा ढाई लाख रुपए है। एक अच्छा बदलाव, जिस पर सरकार काम कर रही है, वह है इनकम टैक्स रिटर्न को 24 घंटे के भीतर प्रोसेस करना और इसका रिफंड भी 24 घंटे में ही शुरू कर देना। इसमें कोई शक नहीं कि अंतरिम बजट के इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए मई 2019 के आखिर में आने वाली अगली सरकार को अपने पूर्ण बजट में इसे मंजूरी देनी होगी।

गोयल ने अपनी पार्टी की उपलब्धियों की एक लंबी सूची भी पेश की और आखिर में विजन-2030 के नाम से 10 बिंदुओं की एक लिस्ट सामने रखी। लिस्ट में साल 2022 तक अंतरिक्ष में एक भारतीय को पहुंचाने, भारत को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाने (जोकि भारत लगभग पहले से ही है), प्रदूषण मुक्त बनाने, अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को डिजिटल बनाने और सभी को पीने का साफ पानी दिलाने जैसी तमाम बातें शामिल थीं।

साल 2014 के आम चुनाव से पहले पीएम मोदी का चुनावी अभियान एक बेहतर भारत की उम्मीद के धागों से बुना गया था। उनका चुनावी नारा था- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं।’ इसके अलावा मोदी ने नौकरियां और रोजगार पैदा करने का वादा किया था। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्मेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस’ के फॉर्मूले पर चलने का वादा भी किया था। पांच साल बाद पता चला कि ‘अच्छे दिन’ भी किसी आम चुनावी नारे जैसा ही था। लीक हुई एक सरकारी रिपोर्ट से पता चला है कि नोटबंदी जैसी नाकामयाब और बेढंगे तरीके से जीएसटी लागू करने के बाद भारत में बेरोजगारी का स्तर पिछले 46 सालों में सबसे ऊपर पहुंच गया।

युवाओं की बेरोजगारी का आंकड़ा 13-27 फीसदी के बीच है। इससे हर साल काम में लगने वाले युवाओं की संख्या (1-1.2 करोड़) तेजी से नीचे गिरी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी नाम की एक निजी संस्था का कहना है कि साल 2018 में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने अपनी नौकरियां खोईं। खाने की चीजों के दामों में तेजी का नतीजा विशाल कृषि संकट के रूप में देखने को मिला। इसका प्रमाण हैं देश के हर हिस्से में लगातार होने वाले किसानों के विरोध प्रदर्शन। इन सबके बावजूद सरकार यह मानने को तैयार नहीं है कि देश में नौकरियों की कमी है। गोयल के भाषण के जरिए मोदी सरकार ने एक बार फिर 2014 की तरह उम्मीदें बेचने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि क्या भारत के लोग एक बार फिर उस पर भरोसा करेंगे। यही असली सवाल है।

बीबीसी हिंदी पर प्रकाशित लेख का संपादित अंश

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper