सफेद दाग को जड़ से ख़त्म करने का रामबाण उपचार!

सफेद दाग एक ऐसी बीमारी है जो किसी प्रकार का नुकसान तो नहीं पहुंचाती, लेकिन सुंदरता पर ग्रहण लगा देती है। त्वचा रोग विभाग के डॉक्टरों का भी मानना है कि अचानक सफेद स्वरूप धारण कर लेना एक बीमारी है। इसे सफेद दाग, ल्यूकोडर्मा, विटिलगो आदि नामों से भी जाना जाता है। मुश्किल तब होती है जब यह दाग दिखने वाले हिस्सों मसलन, चेहरे, हाथ, पैर की अंगुलियों, गर्दन आदि में होते हैं। सफेद दाग से खूबसूरती में तो ग्रहण लगाता ही है, इसे लेकर सामाजिक भ्रांतियां भी हैं। कुछ लोग इसे कुष्ठ रोग मानने की भी भूल कर बैठते हैं। कुछ लोगों को यह भय होता है कि यह संक्रामक है, इसलिए लोग ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से बचते हैं। लेकिन ये सब भ्रांतियां हैं। यह एक बीमारी जरूर है लेकिन इससे कोई हानि नहीं होती है। न ही यह संक्रामक है। समय रहते इसका उपचार संभव है।

क्यों होता है? – यह ऑटो इम्यूनिटी डिसआर्डर है। हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाएं होती हैं। इनके अलग-अलग कार्य होते हैं। ऐसी ही कुछ कोशिकाएं होती हैं जिनका कार्य त्वचा को रंगत प्रदान करना होता है। इन्हें मेलानोसाइट्स या कलर सेल्स कहते हैं। इन्हीं कोशिकाओं की वजह से त्वचा को किसी खास किस्म की रंगत मिलती है। मेलानोसाइट्स के साथ ही एक और कोशिका मैक्रोफेजेज भी सक्रिय रहती हैं जो इन्हें स्वाभाविक रूप से प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं। पर कभी-कभी शरीर में ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं कि मैक्रोफेजेज कोशिकाएं मोनोसाइट्स कोशिकाओं को पहचानने से इनकार कर देती हैं जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और वे निष्क्रिय होने लगती हैं। इससे त्वचा का रंग खत्म होने लगता है। कभी यह क्रिया एक ही हिस्से पर स्थिर रह जाती है तो कभी दूसरे भाग में भी फैलने लगती है।

उपचार-

आयुर्वेद में सफेद दाग को कुष्ट का एक प्रकार माना जाता है। सफेद दाग एक प्रकार की कष्ठ साध्य (कठिनाई से ठीक होने वाली बीमारी है, इसके लिए, यह कुष्ठ रोग के बीच गिना जाता है। कुछ लोग कुष्ठ रोगियों के रूप में उनका इलाज शुरू करते हैं और उनसे दूरी बनाते हैं, लेकिन कुष्ठ रोग से कोई संबंध नहीं है। अधिकांश लोग जिनके पास पाचन में विकृति है, वे ल्यूकोडर्मा रोग से छुटकारा पाने की अधिक संभावना रखते हैं। पुराने रोगियों में, यह बीमारी बीमारी के लिए अधिक संवेदनशील है।

सफ़ेद दाग या ल्यूकोडर्मा को जड़ से ख़त्म करने का रामबाण उपचार-

कुटज (कूढा) इस बीमारी के लिए सबसे अच्छी दवा है। कुटज के पेड़ की छाल पाउडर बनाकर दवा के रूप में प्रयोग की जाती है। इसे दिन में तीन बार एक चम्मच लेना चाहिए। स्वास्थ्य वृद्धि भी बहुत उपयोगी दवा है। 4-4 गोलिया दिन में तीन बार लेनिन चाहिए।

भल्लातक (भिलावा ) इसका प्रयोग अवलेह बनाकर किया जाता है। इसमें भिलावा के अतिरिक्त भी कुछ अन्य द्रव्य भी मिलाये जाते हैं। इसका सेवन एक छोटा चम्मच दिन में दो बार करना चाहिए।

बाकुची – इसका उपयोग आयुर्वेद में बाकूची के बीज से सफेद ककड़ी से बने पेस्ट को लागू करके बहुत लोकप्रिय है, यह बीमारी समाप्त होती है।बाकुची के बीजों से तैयार किया पेस्ट इन सफ़ेद दागों पर लगाने से यह रोग ख़त्म हो जाते है।

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